वफा की हद

वफा तलाशुं जो इंसान में नहीं मिलती यह संसार है बिना सिंदूर भरी मांग एक विधवा सा न पैरों में पायल न हाथों में चूड़ियों की खनक यहां मिलती यह इश्क ओ वफा…

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कविता

⚛️कविता 🎆 कविता हो। तुम मेरी कविता हो। चन्दन - सी, चंचल - सी, हृदय के उपवन में लचकती हुई लता हो। मेरी कविता हो। गौरांगी, सुनैना, मितभाषी, मृगनैना हो। चंदा की कौमुदी…

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तितली की बदौलत

मैं एक तितली फूल सी सुंदर बगिया की मैं एक मेहमान फूलों पे मंडराऊं कलियों की सेज मेरे जीने का सामान फूलों का मैं रसपान करूं फूलों का इत्र अपने तन पे मलूं…

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मैं एक फूल हूं

मैं एक फूल हूं कांटों से घिरा खरपतवार के बीच खड़ा गीली गिलगिली मिट्टी में धंसा धूप, आंधी, बरसात, बदलते मौसम न जाने ऐसी कितनी ही विषम परिस्थितियों में फंसा स्वाभिमान से भरा…

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बाल मजदूरी

इन बाल मजदूरों को देखकर कभी-कभी यह सोचता हूँ कब यह बाल मजदूरी खत्म होगी?कब इन मजदूरों का भविष्य सवरेगा? पढ़ने की उम्र में जब यह बाल मजदूरी करते हैं, सच में कहूँ…

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जिंदगी

जिंदगी क्या कहूँ तुझे, तू कभी सहेली है , कभी तू पहेली है, जितनी भी गुजरी है तू! बहुत खूब गुजरी है! कई दफा तू बडी़ हसीन लगी मुझे कई दफा मुझसे ही…

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यादों की सीपें

मेरा घर मेरे कमरे की खिड़की और उससे झांकता मेरा बचपन नजरों में भरता शहर के नजारे आंख के कैमरे से खींचता हसीं मंजरों के दृश्य ढेर सारे यौवन की दहलीज पारकर पहुंचा…

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हा, मैं लड़की हूँ

हा, मैं लड़की हूँ, निडर और प्रतिभावान हूँ,इस समाज के लिए प्रतिष्ठा हूँ, ईश्वर की वरदान भी हूँ, हा, मैं लड़की हूँ विद्या मेरा सिंगार है,अस्मिता ही मेरी वस्त्र है,समाज की रूढ़िवादी जंजीरों…

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कृष्ण का वृंदावन

मैं सूरज की आग हूं चाँद की शीतलता हूं समुन्दर की गहराई हूं आसमान की विशालता हूं एक पहाड़ियों की श्रृंखला पे निःशब्दता का ध्वज लहराती प्रेम की तृष्णा भी हूं मैं एक…

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पिता

एक वृक्ष की तरह होते हैं पिता,बिघ्न-बाधा को झेलकर कुटुम्ब को पालते हैं पिता,सारी समस्याओं को सुलझाकर चेहरें पर हँसी लाते हैं पिता,अपनी अभिलाषाओं को दबाकर बेटे-बेटियों की खुशियों की चाहते हैं पिता,इसलिए…

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