सपनों की रानी

फूल सा तेरा चेहरा गीत क्या लिखूं तेरे रूप पे सौंदर्य की देवी तू श्रृंगार रस की कविता मादक इतनी जैसे शराब हो पावन इतनी जैसे जलता चिराग हो मुस्कुराती जो खिलकर ओस…

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सुमिरन

भाग दौड़ चल लपक चाँद को लेकर जा रही कहाँ लहर डूबती सांझ को नैय्या तैर रही डूबने का भी तो डर है लगी न जो किनारे बीच भंवर फंस जाने का भी…

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स्वाद

स्वाद का भी एक अनोखा संसार होता है यह फल मीठा है या खट्टा यह वस्तु कसैली है या विषैली यह खाने योग्य है या फेंकने लायक यह मसाला तीखा है या फीका…

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एकरूपी जीवन दर्शन

कुदरत की रोशनी तुम्हारी रूह को छूती है मुझे नहीं देखो कुछ भी करो यह भेदभाव मत करो कायनात के सारे रंग तुमने बटोर लिए सारी रोशनी तुमने चुरा ली सारे आसमां के…

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आत्मसम्मोहन

तितली सी पंख फैलाये उड़ रही बादलों के द्वार यह आत्मसम्मोहन ले जायेगा मुझे आकांक्षाओं के लहराते बवंडरों के पार मन में झिलमिलाती एक उम्मीद की किरण रख जमीं पे भी उतरूंगी कलियों…

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एकांत

सोचती हूं पल दो पल दुनिया की हलचल से दूर प्रकृति की शांत गोद में एकांत में चैन की सांस ले लूं इन पेड़ों से सीखूं मन को स्थिर रखकर जीवन की गति…

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जीवनदान

यह लहराता आंचल था या मेरी हसरतों को फंसाता कोई जाल जिसने हवाओं के रुख बदल दिये मेरे दिल से आह निकली कि मेरी धड़कनों के दामन के सिरे चीर दिये शहतूत के…

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अबोध

मैं धंस रही थी जमीन में बिना बात, बेवजह मन को उठाने का कर रही थी भरसक प्रयत्न पर न पानियों में बह रही थी न धरातल पे चल रही थी न ही…

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चंपई कली

एक चंपई कली रंग चुराती फिजा के खुशबू बिखेरती जहां में धूप में खिलती सुबह से शाम तलक महकती खिलखिलाती देखकर उसे जो गुजर जाता पास से चाँदनी रात में सो जाती ओस…

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आ घर लौट चलें

डूबता सूरज भी है कह रहा कि आ घर लौट चलें है तिनकों का आशियाना पर चल आ घर लौट चलें शाम के कुछ लम्हे गुजारेंगे अपनों के साथ रात को देखेंगे ख्वाब…

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जीवन चक्र

समुन्दर भी रास्ते देते हैं जंगल में खो जाने के लिए कांटे लहूलुहान करते हैं पहाड़ के शिखरों पे चढ़ जाने के लिए आसमान छूते आसमान चूमते दरिया फिसल जाते हैं समुन्दर की…

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