जाको राखे साइयां मार सके ना कोय।।

भूख और प्यास से तड़पता हुआ एक गधा जंगल की ओर निकला और हरी घास को देखकर उसका मन प्रफुल्लित हो गया।

ज़िद्दी इंसान ही इतिहास रचता है

जिद्दी लोग ही इतिहास रचते हैं। इतिहास उठा कर देख लीजिये आज तक जिस इंसान ने अपनी जिद को पाला …

पत्ता परिवर्तन

वह खुश हो उठा, आखिर लगभग पाँच सालों बाद वह दर्शक से फिर खिलाड़ी बना था। उसने उस पत्ते के रंग और समूह को गौर से निहारा और अपनी ताश की गड्डी में से

पढ़ी -लिखी बहु

बहु रोते हुए अपने कमरे में चली जाती है ,उसे सास -ससुर के अपशब्द बोलने का इतना दुःख नहीं ,जितना दुःख अपने पति की ख़ामोशी का है ,क्यों