तमाचा

अ और ब दोनों पति पत्नी हैं ।अ जब देखो तब ब को प्रताड़ित करता रहता है ।कभी कभी जरा सी बात पर ब पर हाथ भी उठा देता है ।ब अपने बच्चों…

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माँ और गृहस्थी

माँ को भजन गाने का बड़ा शौक था वह संगीत सीखना चाहती थीं ,मगर तीन बेटों की परवरिश उनके लिए उनके शौक से ज्यादा महत्त्वपूर्ण थी ।गृहस्थी में उनका शौक मन से कब…

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प्रेम

मलखान साम्यवाद पार्टी के जिला अध्यक्ष का पुत्र था ।आती जाती युवतियों को छेड़ना भद्दे इशारे करना और उनका पीछा करना उसके प्रमुख शगल थे ।इस बार उसकी नजर नाबालिंग सुमन पर थी…

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मनोरंजन

आशा को लेखन का बेहद शौक था ।या यूँ कहें कि लेखन द्वारा वह अपने दिल के हर दर्द को कागज़ पर उतार अपनी व्यस्त भागदौड़ और घुटन भरी जिन्दगी में कुछ पल…

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होली

अर्पिता की यह पहली होली थी ।उसने और निखिल ने घरवालों के खिलाफ जाकर प्रेम विवाह किया था ।उनकी शादी में कोई भी अपना शरीक नहीं हुआ और उनका दांपत्य जीवन बड़ों के…

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पहनावा

मिसेज वर्मा सोसायटी की सभी नवयुवतियों के आधुनिक पहनावे पर मौका मिलते ही तंज कसना शुरू कर देती थीं । बेचारी लड़कियां और उनकी मांए मिसेज वर्मा के इस व्यवहार से बहुत आहत…

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घुमक्कड़

समीर ने विवाह के एक वर्ष बाद जब अपनी पत्नी स्मिता के साथ अकेले घूमने जाने की इच्छा जताई तो माँ बिगड़ गयी बोली “अरे अभी तो पूरा परिवार खाटू श्याम के दर्शन…

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चुनावी दंगे

हथोडा पार्टी की रैली में फूला पार्टी के नेताओं ने विद्रोह का स्वर उठाया इतने में हथोडा पार्टी के कार्यकर्त्ता रामनाथ के सर पर फूला पार्टी के कार्यकर्ता मौजीराम ने पत्थर फैंककर मारा…

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महिला एकता समिति

महिला एकता समिति की अध्यक्ष अपनी समिति की सदस्याओं के साथ जब तब धरने पर बैठ जाती थी आखिर यह संस्था और उनकी अध्यक्ष महिलाओं और उनके हितों की रक्षा के लिए मर…

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रिश्ते तार – तार

' खुशहाल वृद्धाश्राम ' का रजत जयंती समारोह ।मुख्य अतिथि के रूप में अमेरिका में बसे मशहूर उद्योगपति श्री आलोक कुमार जी का आगमन ।आलोक कुमार इसी शहर के हैं ।इसी शहर की…

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चेतना शून्य

" देखो प्रताप! यूँ तो बहुत सी बातें है जो दिल को कचोटती है, दर्द पहुँचाती है, किन्तु कोई क्या कर सकता है। सब नसीब का खेल है। किसी के नसीब में हीरे…

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नदी के दो किनारे

जीवन संध्या में दोनों एक दूसरे के लिए नदी की धारा थे। जब एक बिस्तर में जिन्दगी की सांसे गिनता है तो दूसरा उसको सम्बल प्रदान करता है, जीवन की आस दिलाता है।…

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खिचाव

समाजसेवी मित्र के साथ एक दिन मुझे वृद्धाश्रम जाना हुआ जैसे ही हमारी कार उस परिसर में जाकर ठहरी, सभी वृद्धाएं एक साथ अपने-अपने कमरों से बाहर आकर , हाथ जोड़कर खड़ी हो…

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