उसकी ज़िंदगी थी अनूपा

एक दिन अनूपा बस स्टॉप पर नहीं आयी। जहान्वी को अकेले ही जाना पड़ा। शाम को जाह्नवी ने अनूपा की मौसी के घर जाकर पूछा

कालिदास और कलिभक्त

जो मित्र कार ड्राइव कर रहे थे उन्होंने विडोव-मिरर नीचे कर दिया। नवयुवतियां मुस्कुराने लगी…

ईश्वर की चाह

जब दोनों नदी में स्नान कर रहे थे और पानी दोनों के गर्दन तक आ गया, तो अचानक गुरुदेव ने अपने शिष्य की गर्दन को पानी के भीतर डाल दिया। शिष्य के मन में बड़ा आश्चर्य …

दुरुपयोग (लघुकथा)

“सत्य तो यह है कि दोनों एक ही काम कर रहे हैं – मेरे नाम को बेच रहे हैं…”
और उसी समय हवा के तेज़ झोंके से मूर्ति पर रखा हुआ सिक्का….

भिखारी कौन

ट्रैन आने वाली है। राम्या सीधे टिकट खिड़की पर पहुँचती है। भैया जयपुर का टिकट कितने का है। दो सौ पांच सामने से आवाज आई। एक मिनिट राम्या ये कहकर अपने बैग से अपना पर्स निकालने को बैग खोलती है। लेकिन पर्स वहाँ नहीं मिलता। शायद कपड़ो के नीचे दब गया होगा, राम्या ने अपने मन में सोचते हुए वहाँ टटोला। जब वहाँ भी नही मिला तो उसने पूरा बैग छान मारा।अब उसके होश फाख्ता हो गए। पर्स चोरी हो गया था।

छड़ी

रोज की तरह राजेश अपने दफ्तर जाने की तैयारी कर रहा था। उसने अपनी पत्नी मधु से कहा की उसे दफ्तर जाने में देर हो रही है, उसका टिफिन अभी तक क्यों तैयार नहीं है? मधु तुनकती हुई आई और बोली “मुझे क्या तुमने अल्लाद्दिन का जिन्न समझ रखा है, जो तुम्हारी हर फरमाइश बोलते ही पूरी हो जाये। इस घर में हर किसी ने मुझे मशीन समझ रखा है। ये लो पकड़ो अपना टिफिन।”

दुख में ही भगवान को…

कुछ समय बाद पता चला की सुखों की पोटलियाओं का पता ही नही चला सब ख़त्म हो गयी, दुखों की पोटलियों पर किसी ने हाथ नही लगाया|

विश्वासघात

” तुमने मुझे धोखा दिया है , मेरी सम्वेदनाओं के साथ विश्वासघात किया है .वे इस आघात को सहन नहीं …