लघुकथा

लघुकथा जल्दी जल्दी तैयार होकर स्कूल जाने की तैयारी करती हुई मां को आवाज दी, मां खाना दो मुझे देर हो रही है। पहले ही मुझे देर हो चुकी है स्कूल बस निकल…

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एड्रनलिन रश वाली झुरझुरी

दिलीप ने चलती गाड़ी से शराब की बोतल सड़क पर पटकी। नशे में कार चला रहे उसके दोस्त हफ़ीज़ ने उसे टोका। "ऐसे बोतल नहीं फेंकनी चाहिए! जानवरों और लोगों के पैरों में…

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अखबारी सम्मान

||अखबारी सम्मान|| लघुकथा   लगातार बारिश की वजह से अखबार भीगने का खतरा बढ चुका था, और पंडित जी चिंतित हो उठे थे, राजधानी के समाचार पत्रो का बडा सा पेकेट रिक्शे की…

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खुदगर्ज

खुदगर्ज

प्रभा अभी एक ही निवाला मुँह में ले पाया थी कि राकेश के कुछ शब्दों ने उसे झकझोर कर रख दिया। शादी के काफी महीनों बाद पहली बार राकेश उसे रेस्टोरेंट मे खाना खिलाने लाया था वो खासी उत्साहित थी और खुश भी।

पिंक कलर की साड़ी पर सिल्वर कलर की बहुत ही महीन ऐमब्रोइडी हो रही थी मैचिंग की बिंदीं, चूड़ी, टॉप्स, गले का सैट उसके ऊपर खूब फब रहा था। वो इक दम परी लग रही थी। रेस्टोरेंट की तीसरी सीट पर दोनों आमने सामने वाली चेयर पर बैठे हुए थे।

 

मैन्यू कार्ड हाथ में थमाते हुए राकेश ने ही तो प्रभा से खाना ऑर्डर करने को कहा था। वो खाने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। उसकी निगाहें बार बार बरबस ही राकेश पर जा टिकती थी और राकेश तो चौतरफा नजर लिये कभी रेस्टोरेंट की छत, कभी दीवार, कभी काउन्टर, तो कभी गेट, और तो कभी वहाँ आये अन्य लोगों को। उसको तो मानो प्रभा की मौजूदगी से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था। कि तभी खाने का इंतजार खत्म होता है खाना आता है। तब राकेश की नजऱ प्रभा पर पड़ती हैं प्रभा को कुछ गौर से देखने के बाद राकेश वह सवाल पूँछता है जिससे प्रभा सिहर जाती है राकेश कहता है कि- “तुमने तो मेरा पैसा देख कर ही मुझसे शादी की,तुम कितनी सैलफिस हो।”

 

प्रभा को पहले तो एक दम धक्का लगता है फिर वह उस दुनिया से बाहर आती है जिसमें कि वह खोई हुई थी रेस्तराँ के और भी लोगों की नजर अचानक ही प्रभा पर उसी सवाल के साथ पड़ जाती है। प्रभा अपने आप को सम्हालते हुए राकेश से कहती है—-“कि मेरी आपसे न तो लव मैरिज हुई है और ना ही मेरे कहने पर मेरी आपसे शादी हुई है। मेरी आपसे शादी तो मेरे माँ पापा की मर्जी से हुई है। और हर माँ पापा अपनी बेटी के लिये वही वर देखते हैं जो योग्य हो और जॉब करता हो। बेरोजगार और अयोग्य लड़के के घर वो जाते भी नहीं।”

 

प्रभा के जबाब के बाद राकेश के पास कुछ कहने को रहा ही नहीं राकेश सकपकाया सा खाने की तरफ देखने लगा और खाना खाने लगा। और प्रभा ने भी वह निवाला मुँह में लिया जो काफी देर से उनकी हाथों की अंगुलियों में दबा था पर अब खाने में वो स्वाद नहीं था जिस का कि प्रभा बेसब्री से इंतजार कर हरी थी। और अन्य लोगों को भी क्या मतलब सब अपना अपना खाना खाने लगे प्रभा की ओर से नजरें हटा कर। पर राकेश में कोई तब्दीली नहीं दिख रही थी वह फिर भी चौतरफा नजर लिये इधर उधर तकता हुआ खाना खा रहा था। प्रभा ने भी सोच विचार बंद किया और खाना खाने लगी।                                                                                                                                                                                                                                                                                              – पारुल शर्मा

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एक अधूरा सच

एक अधूरा सच ... । उफनती नदी से आवेग का स्वच्छंद प्रवाह भीतरी बंदिशों का त्याग कर अपनी उन्मुक्त दशा का आभास कराती खनकती मधुर हंसी की उन्मादित शीतलता देती वह छुईमुई सी…

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किये का फल

।। किये का फल ।। पाँच वर्षीय आयुष ने अपनी माँ के आँसू पोंछते हुए माँ से बड़ी मासूमियत से पूछा, "माँ, माँ, आपने बताया था कि अगर कोई बुरा काम करता है…

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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

"क्या बेटा बेटा लगा रखा है आपने माँ, कोई अबॉरशन नहीं करवाएगी माला" राघव लगभग चीखते हुये बोला, सब्र जवाब दे गया था उसका। क्यूँ नहीं करवाएगी, घर में पहले से एक बेटी…

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नशा

अस्पताल में अपनी पत्नी के साथ बैठे नीरज गुप्ता जी अपने दिल को कुछ ज़्यादा ही भारी महसूस कर रहे थे। हालाँकि उन्हें कोई दिल की बिमारी नहीं थी मगर हाथ बार-बार सीने…

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चौपाल

नगर से चार किलोमीटर दूर हाइवे पर एक कॉलोनी बसी हुई है। लगभग चार हजार की आबादी वाली कॉलोनी के निवासी नगर में व्यापार करते है। बच्चे नगर के स्कूल में पढ़ते हैं।…

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हनीमून

लघुकथा....हनीमून.......होली मुबारक ------------------------------------------- "तू इतनी उदास क्यों है"..........सियारनी को मुँह फुलाये बैठी देख सियार बोला। तुमसे मतलब ?? तुम तो गाँव देहात के बाहर ही हू हू करके मस्त हो, कभी सोचा है…

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अनाथ

चमेली को स्वयं नही पता था कि उसके माता-पिता कब गुजरे। नादान उम्र थी उस समय चमेली की सिर्फ चार वर्ष। सयुंक्त परिवार में ताऊ और चाचा के बच्चों संग बड़ी हुई। ताऊ…

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संस्कार

संस्कार अनिल "क्या मां आजकल बाबूजी को क्या हो गया है जब देखो वह पूनम और रवि को संस्कारों का भाषण देते रहते हैं| और घर में कोई भी रिश्तेदार या उनके मित्र…

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हाउसवाइफ

रमेश कैसे हो यार खुशी से अनिल अपने दोस्त से गले लग जाता है "बहुत साल हो गए मिले हुए घर में सब कैसे हैं" अनिल ने उत्सुकतापूर्वक अपने दोस्त से पूछा |…

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संतान सुख

छुट्टियों के आज आखिर दिन बहु बेटा दोनो बाजार गये थे मैंने जिज्ञासा वस अपनी पत्नी से पूछा " ये दोनो आज बच्चों को लेकर बाजार क्यौ गये हैं ? " पत्नी ने…

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भेदभाव

प्रधानाध्यापक जी- "हरिराम बधाई हो रोशनी बिटिया ने पूरे गांव का नाम रोशन किया है ,वह बारहवीं में विज्ञान वर्ग से मेरिट में आई है ,अब तो इसे शहर में भेजकर डॉक्टरी की…

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