मुक्तक

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सड़ता हुआ मांस क्या कहेगा?

By | 2017-12-03T20:57:06+00:00 December 3rd, 2017|Categories: मुक्तक|Tags: , , |

अपने रचे पागलपन की दौड़ में परेशान समाज की कुत्सित मानसिकता "अच्छा-अच्छा मेरा, छी-छी बाकी दुनिया का" पर चोट [...]

रूठ के …

By | 2017-07-02T21:10:32+00:00 July 2nd, 2017|Categories: मुक्तक|

जीत छीन लो हार न छीनो। जीने का अधिकार न छीनो। अंगार मुझे दो चाहे जितने, रूठ के मेरा [...]

सुधि मेघ …

By | 2017-07-02T21:07:46+00:00 July 2nd, 2017|Categories: मुक्तक|

तड़प उठी साँसों की बदरी भीग उठी नयनों की नगरी चीखा फिर शृंगार हिया का सुधि मेघ की बरसी [...]