भगवान बुद्ध के कल्याण कारी सूत्र ।। नमो बुध्दाय।। राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा

🌷🌷🌷🌷सभी को धम्म कामनाएँ 🌷🌷🌷 नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्म बुद्धस्स, ३ बार बुद्धं संकेतं, धम्मं ज्ञं, संघं गणं गच्छामि, ३ बार ************ गाथा - बाहु सच्चञ्च सिप्पं च, विन्यो च। कुशाक्खितो! सुभासिता च…

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वो आँखे

सरपट भागती ट्रैन के साथ और हर बदलते नजारे के साथ बदल जाते है उसके चेहरे की भावनाएं,उसकी वो हँसी, वो नजाकत भरी नजरें पल पल बदलते नजारे के साथ बदलती उसकी हर…

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जिंदगी में दौर इम्तिहान का जो चल रहा

दौर इम्तिहानों का जो चल रहा क़भी हार रहा क़भी जीत रहा क़भी उलझा किसी सवाल में क़भी किसी सवाल का जवाब बन रहा जिंदगी में दौर इम्तिहान का जो चल रहा उलझा…

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वो भी क्या मुलाकात थी

वो भी क्या मुलाकात थी वो खोए रहे खुद में मैं भी बस चुपचाप थी मुददतों बात की मुलाकात थी पहली और शायद आखिरी मुलाकात थी जब वो मेरे इतने नजदीक था न…

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कर लेती है खुद से ही बेवफाई तभी तो वो तेरी कहलायी

कर लेती है खुद से ही बेवफाई तभी तो वो तेरी कहलायी किसी की माँ किसी की बेटी किसी की पत्नी किसी की प्रेमिका बन पायी कर लेती है खुद से ही बेवफाई…

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मिट्टी मेरे गांव की

"मिट्टी मेरे गांव की"- बुन्देली काव्य संग्रह:- लेखिका - जयति जैन "नूतन" प्रकाशक- श्वेतांशु प्रकाशन, नई दिल्ली बुंदेलखंड में जन्मी लेखिका ने अपनी मातृभाषा में 104 पेज का बुन्देली काव्य संग्रह "मिट्टी मेरे…

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वो सावन के झूले

हमारा घर मतलब बाबूजी का घर झरोखा महल जैसा था.बडी रौनक होती थी उन दिनों.बाबूजी के यंहा सामने की छपरी मे झूला डला था.जिसपर हम कभी भी बैठकर झूलते थे,साथ में रेडियो भी…

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मानसुन के दिन

जब बारिश की शुरूआत होती थी, घर मे अजीब सी उमस रहती। बाहर बदली छाई होती। घर मे हलचल होती। खेती के कामों से पिताजी नौकरों के साथ खेत जा रहे होते। मां…

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वो सुबह

जब मै बुआ जी के घर रहती थी, तब तीन -चार बरस की रही होंगी। तब की याद है। अलसभोर मे आंख खुलती तो बुआ जी को सामने बरामदे मे मुंह धोते देखती।…

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अजनबी तुम

अजनबी तुम कौन हो कहाँ से आये हो बोलो यूँ मुस्कुराते हो जैसे कभी मिले थे हम तुम याद हो तो कह दो  न क्यूँ सताते हो बोलो

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