मिट्टी मेरे गांव की

“मिट्टी मेरे गांव की”- बुन्देली काव्य संग्रह:- लेखिका – जयति जैन “नूतन” प्रकाशक- श्वेतांशु प्रकाशन, नई दिल्ली बुंदेलखंड में जन्मी …

आधुनिक तकनीक को मात देता प्राचीन भगवान श्री जगन्नाथ जी का मंदिर…

भगवान श्री जगन्नाथ जी के मंदिर के गुंबद में लगा विशेष पत्थर आज तक अबूझ पहेली बना हुआ है कारण इस पत्थर की विशेषता है कि मानसून आने के लगभग एक पखवाड़ा पूर्व से ही मंदिर के गुंबद में लगे इन पत्थरों से पानी की बूँदे स्वत: टपकने लगती हैं

तौबा! यह दोगले लोग (हाय-व्यंग्य कविता)

मगर बुराई करें, कोसे पीठ पीछे,
आपसे मिले वोह बड़े हमदम बनकर,

स्वागत नववर्ष !

एक शायर अमीरुल्लाह तस्लीम की यह पंक्तियां सोचने पर विवश करती हैं।
सुबह होती है, शाम होती है। उम्र यूं ही तमाम होती है।