आधुनिक तकनीक को मात देता प्राचीन भगवान श्री जगन्नाथ जी का मंदिर…

भगवान श्री जगन्नाथ जी के मंदिर के गुंबद में लगा विशेष पत्थर आज तक अबूझ पहेली बना हुआ है कारण इस पत्थर की विशेषता है कि मानसून आने के लगभग एक पखवाड़ा पूर्व से ही मंदिर के गुंबद में लगे इन पत्थरों से पानी की बूँदे स्वत: टपकने लगती हैं

तौबा! यह दोगले लोग (हाय-व्यंग्य कविता)

मगर बुराई करें, कोसे पीठ पीछे,
आपसे मिले वोह बड़े हमदम बनकर,

स्वागत नववर्ष !

एक शायर अमीरुल्लाह तस्लीम की यह पंक्तियां सोचने पर विवश करती हैं।
सुबह होती है, शाम होती है। उम्र यूं ही तमाम होती है।

क्या आपको भी हिंदी बोलने मैं शर्म आती है?

जब विदेशी आप के राष्ट्रभाषा का सम्मान करें तो इससे अच्छी बात कुछ हो सकती है भला? मेरी आँखें उस समय खुली की खुली रह गयीं जब मैंने नेपर्विल ( शिकागो का उपनगर जो illinios राज्य का एक शहर है) के पब्लिक लाइब्रेरी में मुंशी प्रेमचंद की “गोदान” और “ठाकुर का कुआँ” देखी।

आया नवरात्री का त्यौहार

पावन कर दो मेरा जीवन, दूर करो माँ कष्ट विकार|
कर लो माँ की जयजयकार, आया नवरात्री का त्यौहार|