पाताल लोक – एक समीक्षा

पाताल-लोक नाम सुनकर ही जाहिर है कि पाताल-लोक किसी ऐसे परिवेष की कहानी है जहाॅ इंसान की जिन्दगी की घुणित तस्वीर दिखायी देती है। जहाॅ मेहनत का फल मीठा नहीं और रिष्तों का…

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पतझड़

वसन्त में भी पतझड़ है तुम्हारे साथ के बिना| चाँदनी रात भी अमावस है प्रभात के बिना| तुम्हारे बिछोह में जिन्दगी सूनी है ऐसे, जैसे सूनी हो सावन बरसात के बिना|

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लॉकडाउन के मुश्किल दिनों की मनोव्यथा

A long whatsapp message written to my sister Sabrina Osborne who lives in London. यह मैसेज lockdown के मुश्किल दिनों की मनोव्यथा को व्यक्त कर रहा है। Yesterday and day before yesterday I…

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हिन्दी

लिखते रहना ही हिन्दी है जरा सुनो भाई बदलाव लाने के लिए स्वार्थों को त्यागना पड़ेगा उदाहरण आपके करीब ही मिल जायेंगे। अनिल कुमार सोनी

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ट्रेन और टॉयलट…!!

ट्रेन और टॉयलट...!! तारकेश कुमार ओझा ट्रेन के टॉयलट्स और यात्रियों में बिल्कुल सास - बहू सा संबंध हैं। पता नहीं लोग कौन सा फ्रस्ट्रेशन इन टॉयलट्स पर निकालते हैं। आजादी के इतने…

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जाने वाले वर्ष की यही बड़ी आशीष

अलविदा हो रहा हूँ || ले लो मेरी दुवाये || पलट कर के अब तो || आना नहीं है || तेरे जिंदगी के || झंझट में पड़ के || जीवन को यूं ही…

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आभार

शब्दों को रूप देने का सपना हुआ साकार हिंदी लेखक टीम का बहुत-बहुत आभार । ऐसे ही मिलजुल आगे बढ़ते रहें, कुछ लिखते रहें कुछ पढ़ते रहें । बढ़ता ही रहे हमारा लेखक…

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लेखक शास्त्री राहुल बौद्ध सिंह कुशवाहा

Rahul Singh bauddha kushwaha 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🍀🌲🍃🌿🌴🌾🌺🍃🌿🌻🌴🍁🌼🌸🍃🌲 यदि मैं कहूँ कि * एक आदमी 20 लीटर पानी एक बार मे पी गया * एक #मेढक हाथी को निगल गया * भालू हवा में उड़ता है…

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भगवान बुद्ध के कल्याण कारी सूत्र ।। नमो बुध्दाय।। राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा

🌷🌷🌷🌷सभी को धम्म कामनाएँ 🌷🌷🌷 नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्म बुद्धस्स, ३ बार बुद्धं संकेतं, धम्मं ज्ञं, संघं गणं गच्छामि, ३ बार ************ गाथा - बाहु सच्चञ्च सिप्पं च, विन्यो च। कुशाक्खितो! सुभासिता च…

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वो आँखे

सरपट भागती ट्रैन के साथ और हर बदलते नजारे के साथ बदल जाते है उसके चेहरे की भावनाएं,उसकी वो हँसी, वो नजाकत भरी नजरें पल पल बदलते नजारे के साथ बदलती उसकी हर…

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जिंदगी में दौर इम्तिहान का जो चल रहा

दौर इम्तिहानों का जो चल रहा क़भी हार रहा क़भी जीत रहा क़भी उलझा किसी सवाल में क़भी किसी सवाल का जवाब बन रहा जिंदगी में दौर इम्तिहान का जो चल रहा उलझा…

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वो भी क्या मुलाकात थी

वो भी क्या मुलाकात थी वो खोए रहे खुद में मैं भी बस चुपचाप थी मुददतों बात की मुलाकात थी पहली और शायद आखिरी मुलाकात थी जब वो मेरे इतने नजदीक था न…

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कर लेती है खुद से ही बेवफाई तभी तो वो तेरी कहलायी

कर लेती है खुद से ही बेवफाई तभी तो वो तेरी कहलायी किसी की माँ किसी की बेटी किसी की पत्नी किसी की प्रेमिका बन पायी कर लेती है खुद से ही बेवफाई…

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तेरी यादों का शायर

- 1 आज के दौर की आशिकी लबों से जिस्म पर आकर खत्म हो जाती है आज जो तेरी है कल किसी ओर की बाहों से लिपट जाती है -2 गलतफहमीयों का दौर…

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मिट्टी मेरे गांव की

"मिट्टी मेरे गांव की"- बुन्देली काव्य संग्रह:- लेखिका - जयति जैन "नूतन" प्रकाशक- श्वेतांशु प्रकाशन, नई दिल्ली बुंदेलखंड में जन्मी लेखिका ने अपनी मातृभाषा में 104 पेज का बुन्देली काव्य संग्रह "मिट्टी मेरे…

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