मुझे नहीं पता था कि वह आखिरी मुलाकात है

डॉ. गंंगाप्रसाद विमल के प्रति यह संस्मरण,श्रद्धांजलि है। मैं सचमुच उनके साथ पटना जाने के लिए तैयार था कुछ कहता, इससे पहले उन्होंने ही कह दिया "तुम्हारे विद्यार्थी तुम्हें बहुत पसंद करते होंगे…

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छोटी लड़की से छोटी बहन तक का सफर

7 जनवरी 2019 को डायट के स्वामी विवेकानंद हॉल में मंडल के माध्यमिक स्तर पर तैनात संविदा स्पेशल शिक्षकों के प्रशिक्षण का कार्यक्रम था। ट्रेनिंग थोड़ा विलंब से शुरू हुआ ऐसे में हम…

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बेटियां अनमोल हैं

बीसवीं सदी अपने अंतिम दौर में थीI वर्ष 1998 के अगस्त माह की चौदह तारीखI समय : प्रातःकाल स्थान : हमारा घर रात्रि के स्याह आँचल में से सूर्योदय से पूर्व की लालिमा…

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तुम्हारा पहला प्रेम पत्र

"तुम्हारा पहला प्रेमपत्र" आज अलमारी की दराज में तुम्हारा प्रेम पत्र मिला जिसें मैंने अपनी सबसे अनमोल धरोहर की तरह सहेज कर रखा था। पता है उसमें आज भी तुम्हारी लिपिस्टिक लगाकर चूमी…

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वो आँखे

सरपट भागती ट्रैन के साथ और हर बदलते नजारे के साथ बदल जाते है उसके चेहरे की भावनाएं,उसकी वो हँसी, वो नजाकत भरी नजरें पल पल बदलते नजारे के साथ बदलती उसकी हर…

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जब यादगार बन जाए अनचाही यात्राएं ….!!

जब यादगार बन जाए अनचाही यात्राएं ....!! तारकेश कुमार ओझा जीवन के खेल वाकई निराले होते हैं। कई बार ऐसा होता है कि ना - ना करते आप वहां पहुंच जाते हैं जहां…

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भूख – प्यास की क्लास ….!!

भूख - प्यास की क्लास ....!! तारकेश कुमार ओझा क्या होता है जब हीन भावना से ग्रस्त और प्रतिकूल परिस्थितियों से पस्त कोई दीन - हीन ऐसा किशोर कॉलेज परिसर में दाखिल हो…

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भूख – प्यास की क्लास ….!!

भूख - प्यास की क्लास ....!! तारकेश कुमार ओझा क्या होता है जब हीन भावना से ग्रस्त और प्रतिकूल परिस्थितियों से पस्त कोई दीन - हीन ऐसा किशोर कॉलेज परिसर में दाखिल हो…

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गांव की बारात (पहाड़ी लेख )

गांव की बारात का यह शब्द जब भी हमारे कानों में गूंज पड़ता है मानो तब-तब गांव में होने वाली शादियों कि एक स्मृति हमारे यादों में या यह कहें इन गांव में…

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पहाड़ का अस्तित्व- ( पहाड़ की नारी)

नारी के बिना पहाड़ अधूरा - या यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि पहाड़ का अस्तित्व ही नारी के कारण टिका हुआ है यदि पहाड़ों से कुछ हद तक पलायन रुका है…

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यूकेलिप्टस, कौवे और मैं

हर रात जैसे तैसे करवटें ले लेकर गुजरती। हर रात सुबह का इंतजार, हर सुबह जेठ की भरी दुपहरी का इंतजार, हर दोपहर शाम होने का इंतजार, हर शाम रात होने का इंतजार…

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वह एक लालटेन

अब तो गांव-गांव मैं बिजली हूआ करती है यदि कभी बिजली चली भी जाती है तो हम लोग अपनों घरों को उजाला करने के लिए मोमबत्ती या चार्जेबल बैटरी का उपयोग करते हैं…

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हावड़ा – मेदिनीपुर की लास्ट लोकल ….!!

कई तरह की सही - गलत धारणाएं हो सकती है। जिनमें एक धारणा यह भी है कि देर रात या मुंह अंधेरे महानगर से उपनगरों के बीच चलने वाली लोकल ट्रेनें अमूमन खाली ही दौड़ती होंगी।

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