नालायक बेटा

अब न माँ न माँ से जुड़े रिश्तें…. कोई मिलते भी है तो अजनबी की तरह। अब दिल मे कोई ख्वाहिश भी नही रही, माँ बहुत कुछ अपने साथ ले गयी….बहुत कुछ नही सबकुछ।

अभिनंदन की शौर्य गाथा

घर लौट के कैसा लगता है, पूछो उस वीर जवान से,  शेरों की भांति निडर खड़ा रहा, नहीं धमका पाक़िस्तान …