मेरी बुआ ही मेरी माँ

दुनियाँ की किसी भी माँ का सम्पूर्ण जीवन तो अपने परिवार, पति और बच्चों के लिये ही समर्पित रहता है। माँ अगर त्याग न करे तो उसके बच्चे का जीवन संवर ही नहीं…

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नालायक बेटा

अब न माँ न माँ से जुड़े रिश्तें.... कोई मिलते भी है तो अजनबी की तरह। अब दिल मे कोई ख्वाहिश भी नही रही, माँ बहुत कुछ अपने साथ ले गयी....बहुत कुछ नही सबकुछ।

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अभिनंदन की शौर्य गाथा

घर लौट के कैसा लगता है, पूछो उस वीर जवान से,  शेरों की भांति निडर खड़ा रहा, नहीं धमका पाक़िस्तान से| गैर मुल्क में घुस पड़ा था, अपना सीना तान के, पुर्जे पुर्जे…

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