सानिया (भाग 1)

सानिया( गलती कहां हो गई) सानिया हंसमुख स्वाभाव की और अल्हड़ लड़की थी घर या बाहर उसकी वजह से गुंजायमान रहता। जहां भी वह होती मनोहर वातावरण रहता, सानिया का कालेज पिकनिक जा…

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सानिया (भाग 2)

अभी तक सानिया एक हंसमुख लड़की होती है और विदेश में रहने वाले लड़के से शादी के लिए इन्कार कर देती है क्योंकि उसे अपने ही देश में रहना अच्छा लगता है साथ…

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शिक्षक या शापित (भाग 1)

अभी दो दिन पहले मैं रस्ते से जा रहा था. रास्ते के एक बाजु में कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था. कुतूहलवश  मैं वहा थोड़ी देर रुक गया तो मुझे वहाँ एक लड़का…

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यथार्थ

यथार्थ    (उपन्यास- अध्याय 2) .... सिर्फ पॉच मिनट में समीक्षा मकड़ी के जाल से पटे उस स्टोर रूम का दरवाज़ा खोल रही थी। मकान के पिछले हिस्से में बने इस अन्धेरे, दस स्केव्यर…

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यथार्थ

यथार्थ (अध्याय-1) एक ढ़लता दिन और बारिश के पानी से तर एक लहराती, पहाड़़ी सड़क। देवदार की पत्तियों पर अटकी बूंदे झाड़़ते सर्द झोंके, बादलों के आते-जाते गुबार, और पहाड़़ की सतह पर…

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