आखिर क्या है रिश्तों की डोर

परिवार का विस्तार (extension of family)… केवल परिवार में जन्मे बच्चे ही परिवार नहीं हैं, सामाजिक रिश्ते भी उतने ही …

पेरेंटिंग #एक पत्र, युवा बच्चों के लिए…

एक पत्र, युवा बच्चों के लिए … जिसने भी ऊंचाइयां छूई हैं, उसमें परिवार का सहयोग, समयानुकुलता,भाग्य तो है ही, …

वो सावन दिखे तो बताना!

वो सावन दिखे तो बताना! सावन में नव विवाहित स्त्रियों की (मायके जाने की) प्रतीक्षा आजकल तो समाप्त ही हो …

रिश्तों का अतिक्रमण

✍ रिश्तों का अतिक्रमण _____ कई बार जाने अनजाने में हम अपनी सीमाओं को पार कर जाते हैं, हालांकि यह …

गलती, मानने में हिचक क्यों…

गलती मानने में हिचक कैसी? अगर आप समय पर अपनी गलतियों को #स्वीकार नहीं करते हैं, तो आप एक और …

एक पत्र पेरेंट्स के लिए

हैलो पेरेंट्स … बच्चों की  परवरिश को लेकर मुझे  कुछ  कहना है। आपके बच्चों को आप जैसा बनाते हैं, वह …

समझ

मेरे विचारों से ये पूर्ण सत्य नही है जब कोई रचनाकार कुछ लिखता है तो ज्यादातर समाज मे देखी जाने वाली स्थितियों और परिस्थितियों को अपने शब्दों में लिखता है तो उन अल्फाजों में वेदना, भाव और अहसासों का सामंजस्य होता है जिस बात को वो लिख रहा होता है ये कह सकते हो लेखक ने उसे समाज में महसूस किया होगा न कि वह खुद उस स्थिति से गुजरा होगा या गुजर रहा होगा।

विचारों पर विचार

कहानी लिखते समय कभी-कभी एक दुविधा का सामना करना पड़ता है। एक विचार को आधार बनाकर एक कहानी (या लेख) …