आखिर क्या है रिश्तों की डोर

परिवार का विस्तार (extension of family)... केवल परिवार में जन्मे बच्चे ही परिवार नहीं हैं, सामाजिक रिश्ते भी उतने ही परिवार का हिस्सा हैं। कई बार लगता है, कितना अकेलापन है इस दुनिया…

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पेरेंटिंग #एक पत्र, युवा बच्चों के लिए…

एक पत्र, युवा बच्चों के लिए ... जिसने भी ऊंचाइयां छूई हैं, उसमें परिवार का सहयोग, समयानुकुलता,भाग्य तो है ही, लेकिन सबसे अहम है, आपके द्वारा लिए गए निर्णय। जीवन में हमेशा कुछ…

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वो सावन दिखे तो बताना!

वो सावन दिखे तो बताना! सावन में नव विवाहित स्त्रियों की (मायके जाने की) प्रतीक्षा आजकल तो समाप्त ही हो गई है। ना तो पहले जैसे रिवाज रहे, और ना ही उन त्यौहारों…

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बच्चों के लिए

✍ बच्चों के लिए_____ हमेशा याद रखिए, हां कहने की अपेक्षा नहीं कहना ज्यादा मुश्किल कार्य है। थोड़ा निडर बनिए। यदि आप किसी कार्य के लिए ना कहते हैं, तो हो सकता है…

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गलती, मानने में हिचक क्यों…

गलती मानने में हिचक कैसी--- अगर आप समय पर अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करते हैं, तो आप एक और गलती कर बैठते हैं।गलती मानने में हिचक या हेकड़ी कैसी? आप अपनी गलतियों…

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रिश्तों का अतिक्रमण

✍ रिश्तों का अतिक्रमण _____ कई बार जाने अनजाने में हम अपनी सीमाओं को पार कर जाते हैं, हालांकि यह हमारा उद्देश्य नहीं होता। मुझे आज भी याद है, मेरी मित्र की नई…

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गलती, मानने में हिचक क्यों…

गलती मानने में हिचक कैसी? अगर आप समय पर अपनी गलतियों को #स्वीकार नहीं करते हैं, तो आप एक और गलती कर बैठते हैं।गलती मानने में हिचक या हेकड़ी कैसी? आप अपनी गलतियों…

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एक पत्र पेरेंट्स के लिए

हैलो पेरेंट्स ... बच्चों की  परवरिश को लेकर मुझे  कुछ  कहना है। आपके बच्चों को आप जैसा बनाते हैं, वह कुछ वर्षों की कड़ी मेहनत का  परिणाम है। यह एक तरह की  जीवनबीमा…

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समझ

मेरे विचारों से ये पूर्ण सत्य नही है जब कोई रचनाकार कुछ लिखता है तो ज्यादातर समाज मे देखी जाने वाली स्थितियों और परिस्थितियों को अपने शब्दों में लिखता है तो उन अल्फाजों में वेदना, भाव और अहसासों का सामंजस्य होता है जिस बात को वो लिख रहा होता है ये कह सकते हो लेखक ने उसे समाज में महसूस किया होगा न कि वह खुद उस स्थिति से गुजरा होगा या गुजर रहा होगा।

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क्षणिकाएं

उम्र  यूँ  आई कुछ उनके  हिस्से में जरा-सी मेरे हिस्से  में बाकी  गंवा दी हमनें जमाने  को समझने  में  । (2) तराजू में  तोलना जरा मुश्किल  सा था मगर तब तोला तो पड़ला…

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विचारों पर विचार

कहानी लिखते समय कभी-कभी एक दुविधा का सामना करना पड़ता है। एक विचार को आधार बनाकर एक कहानी (या लेख) गढ़ी गयी। उस विचार से बहुत से अन्य बातें, विचार, उदाहरण और निष्कर्ष…

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सुख

हम में से बहुत से लोग होते है जो की मन ही मन में हर इंन्द्रीय सुख को "सुखी" जीवन से जोड़ते हैं। लेकिन सुख केवल इंद्रिय विषयक नहीं है. सुख और दुख…

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