व्यंग्य

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संस्कार : नए-पुराने

By | 2018-02-17T16:21:52+00:00 February 17th, 2018|Categories: व्यंग्य|Tags: , , |

कहते हैं हमारे हिन्दुस्तानी समाज में जन्म से लेकर मरण १६ संस्कारों से गुजरना पड़ता है, जिसमे सोलहवाँ संस्कार [...]

टॉयलेट : एक प्रेम कथा  उर्फ कलुआ

By | 2017-11-08T10:58:56+00:00 August 17th, 2017|Categories: व्यंग्य|

"हैरी मेट सेजल" का  फ्लॉप होना , दर्शकों का थियेटर  से गालियां देते हुए निकलना  तथा लंबे  वीकेंड के आस पास  टॉयलेट एक प्रेम कथा का सिनेमाकी रजत पर्दे पर आना और हिट हो जाना यह  भारतीय सिनेमा के लिए शुभ शगुन है. अरबपति और अवार्ड विनिंग अभिनेताओं , निर्माताओं , निर्देशकों  के लिए एक करारा जवाब भी है कि कब तक कनाडा , यूरोप , स्विट्ज़रलैंड में“इडिओटिक फॅंटॅसी”  गढ़कर  पब्लिक को  फूल बनाते  रहोगे. कभी क..क..क... किरण , कभी सिनॉरीटा , कभी अंजली -अंजली कह कह कर बाहें फैला -फैला  कर खूब “माल” और “पुरस्कार” बटोरे. अब वेघिसी -पिटी स्टोरी का दौर गया . मगर अपने अक्की भाई ( अक्षय कुमार ) ने पब्लिक की नस पकड़ कर रखी  है और हेरा फेरी के बाद से  साल में दो से तीन फिल्मों के  हिट  देने केफ़ॉर्मूले  की जो आदत पकड़ी है वह अभी तक बरकरार है . हाल के वर्षों में “जॉनी एलएलबी” हो “गब्बर” हो , “हॉलिडे” हो या “एअर लिफ्ट”    . माहौल जब  देशभक्ति का हो तो हॉलीडे और एयर लिफ्ट चलपड़ती है . अपाहिज सिस्टम से लोग बेहाल होकर , करप्शन के खिलाफ सड़कों पर निकलते है तो  गब्बर चल जाती है. अक्की भाई बड़े इज़्ज़त औरएहतराम से  जोली एल एल बी बनकर ज्यूडिशियरी पर पंच दे डालते हैं. आज कल  देश में  "प्रधान सेवक"  की हवा बह रही है . गांधी बापू के गोल चश्मे पर स्वच्छ भारत दिख रहा है. डर्टी पिक्चर वाली "विद्या बालन "शौचालय की सरकारी ब्रांड आंबेसडर बनकर " शौचालय बनवाए " का संदेश दे रहीं हैं. अपने अक्की  भाई भी इस नेक काम  में कहाँ पीछे रहने वाले थे . मुद्दे को " रॉडी राठौड़" की तरह लपका और “एंटटेरमेंट” की तरह तैयार . बड़ेछुपे " रुस्तम " हैं अपने ऐक्शन कुमार . इस बार भी  अपने तरकश से ऐसा तीर निकाला  कि कोई इस सब्जेक्ट पर पहले सोचा भी नहीं था . टॉयलेट.....एक ऐसा शब्द जिसे हम  पब्लिक में चर्चा करना भी वियर्ड समझते हैं. मगर आजकल हर कोई एक दूसरे से पूछ रहा है -"छुट्टियों मेंटॉयलेट  देखी क्या ?" "मैंने तो देखी .....और तुमने ?" बच्चे समझ नहीं पा रहे हैं कि  पेरेंट्स साथ साथ " टॉयलेट" जाने का प्रोग्राम क्यों बना रहे हैं. बॉय फ्रेंड - गर्ल फ्रेंड  एक साथ  " टॉय लेट " देखने को जा रहे हैं फिल्म देखने से पहले  इंटरनेट पर रिव्यू  पढ़ना एक " प्रूडेंट दर्शक " की पहचान बन गयी है. मैंने भी जब इंटरनेट पर रिव्यू खंगला  तो "  धांसू "   , " फॅंटॅस्टिक " , बेस्टम बेस्ट " ,  [...]

गाँधी से मुलाकात

By | 2017-07-17T18:44:32+00:00 July 17th, 2017|Categories: व्यंग्य|

मन में लेके स्वच्छ छवि, निकला घर से जब निकला रवि । गया मन खुशियों से खिल, जब पहुंचा भारत के दिल । नई दिल्ली की देख स्वच्छता,  मन मेरा प्रसन्न हुआ पर बाकी जगहों पर मुझको, कूड़े का अम्बार मिला । आश्चर्य बड़ा था, जहाँ कूड़ा पड़ा था, वहाँ गाँधी जी भी रोते दिखे भारत माँ का मैला आँचल, अपने आँसू से धोते दिखे । देख दशा ये मैंने जमकर, सरकारों पर क्रोध किया पर ऐसा ना करने का, [...]

बत्ती गुल

By | 2017-07-10T16:51:16+00:00 July 10th, 2017|Categories: व्यंग्य|

सरकार ने उच्च पदाधिकारियों के वाहनों से बत्तियां उतारने का फरमान जारी कर दिया | ऐसा प्रतीत हुआ ज्यों [...]