दो पैरों वाला भेड़िया

अब वह देशभक्त पत्रकार जेल में हैं और देशद्रोही नेताजी सभ्य और समाज सेवक का मुखौटा पहनें नये घपले की योजना बना रहे हैं। सोच में ड़ूबे नेताजी का ध्यान उस समय भंग हो जाता हैं जब उस पत्रकार के माता-पिता उनके कक्ष में घुस आते हैं।

प्रकृति का प्रकृति पे कहर

मुझे मालूम है चिड़ियों का बसेरा विलुप्त हो गया
मगर इतनी बेरूखी क्यों हमसे या उस प्रकृति से

कागज को सहते तो देखिए….

फटेहाली में जीना बेहाल था मगर
फिर भी चाय की चुस्की को देखिए।

वेलेंटाइन डे (प्रेम दिवस)

“रोम” के इतिहास के पन्नों को पलट कर देखा जाये तो हमें यह ज्ञात होता है की तीसरी शताब्दी में एक राजा हुआ करता था