आपसे आज दूर रहना….

लम्हा-लम्हा मैंने बिताया उनके एक-एक क्षण कैसे कहें
जिंदा कैसे उनके बेगैर मैं इस जहां में जीते जा रहे हैं

जिसको हमनें समझ बैठा…

ये मेरे मालिक कैसा-कैसा और दिन दिखायेगा
तूने ऐसी क्या हमसे करवाना चाहता है ये मालिक

तेरा साथ चाहिए और कुछ नहीं चाहिए

तेरा साथ चाहिए और कुछ नहीं चाहिए तुझ जैसी नहीं सिर्फ तू ही चाहिए इस जन्म में ना सही बेशक …

होकर तुझसे जुदा अब मुझे जाना कहाँ है?

अब जाऊं भी तो जाऊँ कहाँ तू ही बता
सिर्फ तेरा दिल ही तो है जहाँ मेरे लिए पनाह