यह सेतु है

नदियों के दो किनारों को जोड़ता है सागर के दो छोर पे होकर गुजरता है जमीं और आसमां के तार को जोड़ता है जीवन की बहती धार को जोड़ता है यह सेतु है…

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नदिया के उस पार

चेहरे पे मुस्कान खिली शहर से जो मेरी बैलगाड़ी गांव चली मिट्टी की पगडंडी है कच्चे हैं रास्ते खेतों में लहलहा रही फसल आसमां के नीचे बादल बादलों के नीचे बसे हरियाली है…

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मन की आवाज

यह शोर नहीं मेरे मन की आवाज है सुन सको तो सुन लो इसे इसे मैं तुम्हारे कानों तक कैसे पहुंचाऊं कि हवा न भी चले तब भी तुम्हें पेड़ पे लटके एक…

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हमारी तरह

उनका हुआ महफिल में आगाज़ बदलने लगे हर चेहरे के अन्दाज़ हर पल इन बदलते रंगों के पीछे जैसे छिपा हो राज़ हमारी तरह नैनों ने नैनों से बातें की खामोशी ने तमाम…

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संकल्प लिया है मैंने

नम्र स्वभाव, अच्छा बर्ताव सदा रखूंगी संजोकर पास दुष्ट से जो पड़े पाला, छीन ले मेरा निवाला दूंगी उसे संत्रास फटके न आसपास संकल्प लिया है मैंने अपनों में मिलके रहना बच्चों से…

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हिम

नभ से गिर रही शीत में हिम रुई के फाहे जैसी। हवा है मानों ठिठक देखती यह अभ्र की माया कैसी।। ऐसा लगता ' ख' में कोई खिली हुई पंखुड़ी कपास है। चिंदी-चिंदी…

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नया वर्ष

नया साल फिर एक नया संघर्ष इस बार ये न जाने क्या ले कर आएगा। खुशियाँ बेहिसाब या दर्द आपार देगा या संतुलित सा जीवन हमे उपहार देगा। जो भी देगा जितना भी…

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एक पल की दुल्हन

उस दिन गाँव में बहुत चहल पहल थी। छोटी सी आदिवासी गाँव। चारों ओर लम्बी लम्बी सखुआ के विशाल पेड़ और महुवा वृक्षों से घिरा प्रकृति की गोद में बसा यह गाँव रसोइया…

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नववर्ष सदा मंगलमय हो

नववर्ष सदा मंगलमय हो, अमंगल का अवशेष नहीं; मानव-मानव सब एक सम, रहे भेद-भाव कुछ शेष नहीं। दुर्भाव-अभाव गिले-शिकवे, हों भस्म प्रेम की ज्वाला में; मन निर्मल औ पुलकित हो, कुंदन बन जाए उजाला में। मात-पिता गुरु बाल-वृद्ध,…

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