मां की ममता

मां की ममता का कोई मोल नहीं अनमोल है यह इसका कोई ओर छोर नहीं एक जमीं से उपजता प्यार, एक आसमान से छलकता प्रभु का दिया उपहार है यह अपने बच्चों के…

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बदलते रंग

रंग ही रंग बिखरे हुए मेरे चारों तरफ कैसे पहचानूं अपनों के चेहरों के पल पल बदलते रंग कैसे पाऊं उनका संग जो मेरे तन का रंग छुड़ाकर जा रहे दूर मुझसे जीवन…

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मेरे अल्फाज

1ऐ मुसाफिर जिंदगी की राह में जरा संभल कर चलना यहाँ जख्म तो फूलों से मिलता हैं कमबख्त!काँटों को क्या बदनाम करना 2मुझे ठुकरा कर वो हस कर चल दिए,अपनी बर्बादी का रास्ता…

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बंबई के मुंबई बनने तक बहुत कुछ बदला …

बंबई के मुंबई बनने तक बहुत कुछ बदला ... तारकेश कुमार ओझा बंबई के मुंबई बनने के रास्ते शायद इतने जटिल और घुमावदार नहीं होंगे जितनी मुश्किल मेरी दूसरी मुंबई यात्रा रही ....महज…

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महिला दिवस

नारी सशक्तिकरण पर भाषण देने वालों , ज़रा इन सवालों के जवाब तो दो । उच्च वर्ग की महिलाओं को छोड़कर , नामी फिल्म अभिनेत्रियों को छोड़कर , टाटा ,बिरला और अंबानी सरीखी…

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नारी शक्ति

क्या लिखूँ?कैसे लिखूँ? कुछ शब्द ही नहीं मिल पा रहे हैं, नारी शक्ति की सम्मान में अल्फाज ही नहीं निकल रहे हैं जी हाँ, नारी,शक्ति ही तो हैं जो घर और ऑफिस का…

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सब के बश की बात नहीं

हर कोई को गीत गा नहीं सकता।। हर कोई तान बजा नहीं सकता।। हर कोई साज सजा नहीं सकता।। हर कोई प्रीति निभा नहीं सकता।। हर कोई इंसान हैवान नहीं बनता।। हर कोई…

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समय का पंछी

समय कैसे पंख लगाकर उड़ रहा भवसागर को पार करता थकहार कर बैठ जाता पल तो पल एक चट्टान पे या समुंदर की लहरों पे तैरती एक नाव के मचान पे इस समय…

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धरणी को चमकाती हूँ

मै सूरज की वही हूँ किरणे || जो धरणी को चमकाती हूँ।। सोना चांदी हीरे मोती || धरती में उपजाती हूँ।। फूलो से महक बिखराती हूँ।। चिडियों से गीत सुनाती हूँ || मै…

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