पागल भँवरा

उपवन में खुश्बू महक रही है ॥ कलियाँ क्या मुस्काती है ॥ प्रेम का जादू चला चला के ॥ अपने पास बुलाती है ॥ मै मतवाला मस्त मगन हो ॥ मधुवन में मँडराता…

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मिलना पलभर का

पौधे की हरी पत्तियों पे कोई फूल नहीं कोई कांटा नहीं कोई तितली नहीं कोई भंवरा नहीं पड़ी है इसपे अस्थाई रूप से लटकी एक ओस की बूंद न जाने कौन से आसमान…

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मैं न सोऊं

सो गई निंदिया मैं न सोऊं ख्वाबों में जगती रात भर मैं न सोऊं दिन उगे तो लगे सांझ ढली कब रात्रि बेला में चांद के तन पे चांदनी खिली कब कोई मुझे…

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दिखावा

नए घर में  शुनभागमन करना था तो कोई शुभ कार्य भी करना था, इसलिए हमने *मां जगदम्बा माता रानी* के जागरण का आयोजन किया था । सभी रिश्तेदारों सगे-संबंधियों को और मित्रों को…

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