“गुलाब गज़ल “

गुलाब की खुशबू गज़ल में होती काश ! पढ़ते नहीं सूंघते लोग गज़ल की खुशबू गुलाब में है तभी तो गुलाब पसंद करते है लोग ।     अनिल

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“फरिश्ता”

  मानव कीआदत हैयेधर्म मेंभाग लेने कीराहसिर्फ धर्म हीबता सकता है.धर्मको मानता कौन हैजानताकौन हैउत्तर अजीब मिलता हैंअजनवी.अजनबी कौन होता हैफरिश्ता.फरिश्ता भी हम में से हीहोता है.चक्कर में डाल देता हैधर्म की आस्था…

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“हिंदी की परख”

रोना हँसना बोलना आहट् आवाज कान में घंटी सुनाई दे कराहना जोर से बोलो या फिर धीरे से पूछना गुस्से में खड़ी बोली अथवा किन्नर के गाने बरेदी की हल्कार बेटी की विदाई…

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“भारत महान”

भारत महान धर्म सभी दिशाओं में हों हमारे करीब हों कोई भी हो जीने की राह सिखाते हैं मंत्र पढ़ कर सोते अजान सुन सुबह उठ जाते हैं गंगा स्नान, घंटों की ध्वनि…

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पेट की भूख

"पेट की भूख ही सबसे बड़ा कारण है अशांति  " विश्व शांति का मतलब है शिक्षा रोजगार और सबको आजादी के अवसर । क्या सभी आजाद है नहीं दो जून की रोटी का…

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“लिखते रहना हिंदी है”

लिखते रहना ही हिंदी है पढ़ते रहना ही हिंदी है मनन करना ही हिंदी है प्रवचन करना हिंदी है गीत गाना भी हिंदी है प्रयत्न करना हिंदी है याद करना भी हिंदी है…

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आह

आह से आहत अगरआदमी हैअसर आदमी को होगाआह यहाँ वहाँ आत्मा सीभटकती  जाकरआदमी के सिर बैठ करअसर आदमी को करेगाआह की पहचानआहत ही जान सके आहट

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“क्या ये सच है”

कोई क्या सभी बह रहे भाव में न तो आव देखते न  ताव देखते। बुझाने की बात करें तो सुलगाते उठाना  कहे तो गिरा देते उसको। कसम ऊपर वाले की सभी सच बोलेंगे…

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“आओ कविता बनाये”

बनाए कविता   चटनी बाँटना चंदन घिसना तेल निकालना कनक रजत बर्क बनाना/पीटने से कठिन है कविता लिखना ।   आपका क्या कहना००००००००l

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“केदारनाथ”

केदारनाथ याद में कुछ नहीं कहना उनकी भाषा     ही कुछ एसी है "प्रलयंकर" कहते हैं तो रूप का दर्शन कीजिये.   अनिल कुमार सोनी पत्रकार पाटन जबलपुर

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“जिंदगी का मोड़”

"मोड़ जिंदगी का" जान की बाजी लगा कर खेला था खेल हंसी  थी जनता ताली भी बजी थी कटोरे में पैसे मांगे मुंह फेर लिया  था सबने लोहे की राड टेंटुए में अड़ा…

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“मुवाईल योगा”

मुवाईल योगा मुवाईल योग प्रारंभ करें किसी भी समय किसी भी स्थान हाथ में मुवाईल नज़र स्क्रीन पर उंगली करते रहे जब तक बैटरी     शान्त हो जाये         चार्ज करें बैटरी पुनः…

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“हिंदी के हस्ताक्षर”

हस्ताक्षर नकली हैं के कह ने वालो होश में आओ हस्ताक्षर नकली नहीं असली हैं अक्षरों को हमने गीत संगीत लय राग रागनियों ठुमरी दादरा मालकौंश धमार में हस्ताक्षरों को लहराते हुए किये…

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राखी की गठांन

राखी की डोर मेंजो गठॉन पड़ती हैदिलों की पड़ी दरार  भी भर जाती हैपुनःगठॉनदिलों में नहीं पड़तीभाईयों बहिनों कोमिलता हैमाँ बापू का प्यार राखी की डोर मेंजो गठॉन पड़ती है यहीराखी बंधन है

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“दिगंबर”

खुद ने खुदा के लिये खोदा अपना नाम जमीं पर जगह थी दूसरे के नाम एक दिल जो खाली था उसमें भी भरे हजारों नाम अंबर में खुदा दिग्मबर का नाम । अनिल…

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