आज का भरत

बड़े भाई विकेश को नौकरी के सिलसिले में दो माह के लिए दूरस्थ शहर में जाना पड़ गया | उसने छोटे भाई सोमेश को अपने पास बुलाया और समझाया, 'देख, पिताजी की ठीक से देखभाल करना |…

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विचित्र प्रश्न

जो जले हो आग में तो उसको बुझाया जाए, क्रोधाग्नी में जो जले उसे कैसे बुझाया जाए!   अगर जो रूठे लाड़ में तो उसको मनाया जाए, बिना रूठे जो न बोले उसे…

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संकल्प

राह भटकता फिर भी चलता सुबह से लेकर शाम तक किधर से निकलूं किधर है जाना नहीं मुझे पहचान अब तपती गर्मी , ठिठुरती राते चाहे घन बरसे जमकर राह में चलना फिर…

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आलोचना

आलोचनाओं से न डर रहो पथ पर तुम अड़े कीचड़ उछालने को यहाँ है बहुत पत्थर पड़े तेरे प्रयासों की यहाँ नही किसी को कद्र है तेरे पगों को रोकने हैं यहाँ बहुत…

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मायूसी

"किसी के मायूस बैठने की वज़ह हमेशा गम नही होता , ये भी तो मुमकिन है कि उसे मुस्कुराने की किसी वज़ह की तलाश हो।।" - शिवम् मिश्रा

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अपने-अपने आईने

शहीदी सींच से आज़ाद धरा पर जो पली थी जनतंत्र फ़सल उसमें स्वार्थी किरचें ख़रपतवार सी उगीं और जनने लगी आईने अब अपने - अपने चेहरे अपने - अपने आईने । - राम…

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म्यांमार लोकतंत्र की ओर

सुरेश कुमार पाण्डेय, ‘हिन्दी लेखक डॉट कॉम’ के लिए       म्यांमार में लोकतंत्र की विजेता 'आंग सान सू की' की पार्टी एनएलडी(नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी) गत दिनों हुए चुनावों में जरूरी दो तिहाई बहुमत पा…

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G-20 का वर्तमान परिदृश्य और प्रासंगिकता

सुरेश कुमार पाण्डेय, 'हिन्दी लेखक डॉट कॉम' के लिए          द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से ही पश्चिम के विकसित देश ब्रेटनवूड संस्थाओं(IMF और वर्ल्ड बैंक)(जिसे ब्रेटनवूड ट्विन्स भी कहा जाता है)…

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” मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है – अरस्तु ” का अभीप्राय :-

युनानी नगर-राज्य(city-state) की गहरी छाप युनानियों के चिन्तन पर पड़ी है.यह आज के नगर से पुरी तरह भिन्न है.आज का नगर एक भौगोलिक इकाई है जबकि इसके ठीक विपरीत युनानी नगर-राज्य एक सामाजिक…

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समाज और चारित्रिक बोध

समाज का चरित्र कैसा हो,इसपर प्राचीन पीढियों से लेकर आज तक काफ़ी शोध हो चुके हैं परंतु संतोषजनक उत्तर पाने में हम नाकाम रहे हैं.वर्तमान में मुख्य चुनौति है,"इसकी चारित्रिक पतन पर लगाम…

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समझ कब आयेगी?

सफ़ेद बादलों से सजा आकाश मुझे आज आकर्षित कर रहा है,लगता है कुछ शुभ होने वाला है लेकिन सफ़ेद बादलों के पिछे छिपी काली रात का क्या? याद है,मैंने सुना है कि हर…

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हे सखे

माना न थे तुम कृष्ण, न हम ही थे सुदामा पर कम नही कुछ इससे, था अपना भी याराना दूजा न कोई इसमें , कभी और रह सकेगा तेरी दोस्ती के आगे ,…

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अंत:मन का समर

अन्तकरण में है मचा, प्रलय का देखो एक कहर हर कोई खुद में समेटे, है यह कैसा एक समर कोई तन्हा रुदन करता, ओठों पे मुस्कान धर पर निरंतर चल रहा स्वत:में कैसा…

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