समाज और चारित्रिक बोध

समाज का चरित्र कैसा हो,इसपर प्राचीन पीढियों से लेकर आज तक काफ़ी शोध हो चुके हैं परंतु संतोषजनक उत्तर पाने में हम नाकाम रहे हैं.वर्तमान में मुख्य चुनौति है,"इसकी चारित्रिक पतन पर लगाम…

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समझ कब आयेगी?

सफ़ेद बादलों से सजा आकाश मुझे आज आकर्षित कर रहा है,लगता है कुछ शुभ होने वाला है लेकिन सफ़ेद बादलों के पिछे छिपी काली रात का क्या? याद है,मैंने सुना है कि हर…

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हे सखे

माना न थे तुम कृष्ण, न हम ही थे सुदामा पर कम नही कुछ इससे, था अपना भी याराना दूजा न कोई इसमें , कभी और रह सकेगा तेरी दोस्ती के आगे ,…

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अंत:मन का समर

अन्तकरण में है मचा, प्रलय का देखो एक कहर हर कोई खुद में समेटे, है यह कैसा एक समर कोई तन्हा रुदन करता, ओठों पे मुस्कान धर पर निरंतर चल रहा स्वत:में कैसा…

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बेरोज़गार

अधूरे ख़्वाब थे आँखों में उसकी चेहरे पर एक दर्द था फैला हुआ। मजिलो की चाह में नाकामयाबी मिलती रही जिनके स्याह ख़ौफ़ से वो इंसान था टूटा हुआ। पूछता था लोगों से…

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हर चेहरे के पीछे एक कहानी छिपी है

हर चेहरे के पीछे एक कहानी छिपी है आँखो में आंसुओ का सैलाब रुका है मुस्कान के पीछे दर्द पल रहे है दिलो में जख्म रिस रिस के नासूर बन रहे है मानसिक,…

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कोई रंज, कोई शिकवा नहीं जिंदगी से

कोई रंज, कोई शिकवा नहीं जिंदगी से बस कह रहा हुँ, अपने इस बेचैन कुलबुलाते दिल से मुस्कानों का श्रृंगार कर के सारी उम्र काट दी खुशियां तह उम्र मोम की तरह पिघलती…

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पिता

ले के आशीर्वाद पल आए पिता, एल्बम से फिर निकल आए पिता| टूटा सोफा चरमराया हिली धीरे खुली खिड़की पीठ चाहे हाथ वत्सल कान चाहे मधुर झिड़की | आँख से आंसू सा ढल…

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बना हिन्द से हिन्दुस्तान

हिन्दी से ही हिन्द बना है , बना हिन्द से हिन्दुस्तान हिन्दी भाषा सबकी जननी, अपना भारत देश महान अलंकार की बिंदिया सजती, स्वर व्यंजन की हो झंकार मातस्वरूपा हिन्दी भाषा , शोभित…

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अकेली मोमबत्ती

दीपावली की रात थी | प्रांजल छत पर बैठा जगमगाते बल्ब के झालरों और सैकड़ों मोमबत्तियों को जलते देख रहा था | उसके घर को छोड़कर लगभग सभी मकानों का यही हाल था |सैकड़ों…

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दिवाली

मिट्टी के दिये, रुई की बाती बचपन की यादें मन में बस जातीं | नन्हें घरौंदें, गुड़िया इतराती | खील-बताशे, रोली और चन्दन फूलों की माला आँगन महकती | संध्या की पूजा, लक्ष्मी…

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जुलाहे की चतुराई

बहुत समय पहले किसी नगर में एक जुलाहा और एक बढ़ई रहते थे | उन दोनों में गहरी दोस्ती थी | एक बार वहां देव-मंदिर का यात्रा महोत्सव हुआ, जिसमें देश-विदेश के अनेक…

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ढोल की पोल

एक बार गोमायु नाम का एक गीदड़ भूखा-प्यासा जंगल में घूम रहा था | घूमते-घूमते वह एक युद्ध भूमि में पहुँच गया | वहां दो सेनाओं के बीच युद्ध होकर समाप्त हो गया…

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