नाविक

पतवारों को थाम लो, नाविक, तूफ़ाँ आने वाला है, दिल में हिम्मत बांध लो, नाविक, तूफ़ाँ आने वाला है। मंज़िल सागर पार है बैठी, हम भँवरो में फंसने वाले हैं, लंगर ऊपर बांध…

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चाहत

चाहत में भूले लोग सरलता से जा नहीं पाते रोगी भी है कष्टों का आसानी से मुकाबला कर लेते है शरीर काम नहीं करता अंग सभी शिथिल शरीर चलायमान नहीं है बस शरीर…

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आंखों से आंसू नहीं अब

शहीदों की अंद्रूनी व्यथा पढकर /देखकर/सुनकर आवेश सा आता है आंखों से आंसू नहीं अब रक्त उतर आता है । मैं कच्चे दिल का नहीं कठोर हूँ नाना बन गया हूँ आंखों से…

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अनशन

भूखें रहकर हमने भी संग किया संघर्ष तुम्हारे लाठी के निशान देह पर जनपथ पर पदचिह्न हमारे । काम करो अब नेताजी अपनी गाथा मत गायो कोष तुम्हारा भरा हुआ था खाली खाता…

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उत्तर मांगते शब्द

आज लिखने का समय हैं, मौन हो तुम पीढियां कोसेंगी तुम को ,ये न समझो वेध देंगे शब्द शर शैय्या बनाकर उत्तरायण की प्रतीक्षा में धरा पर पूर्व उसके द्रोपदी सहसा ठठाकर पूछ…

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अँधेरे के बाद

सदियों सदियों हार हार कर लहरों सा सर मार मार कर सत्यवती की तरह समर्पण- करना है तो मत विचार कर झंझावात प्रलय दावानल आँधी या घनघोर घटायें बुझना ही है ,बढ़ना ही…

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नीर नयनों में नहीं लेकिन समुन्दर में उँफा

विकल हो जाती है माँ  देख दुर्दिनता सोच कर हालात कलेजा फट जाता आत्मा चीत्कार कर उठतीं है उसकी नयनों में शब्दों का सागर उमड़ पड़ता      बढ़ता जाता धरा पर अनाचार ,अत्याचार…

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विश्वास

ईश्वर है आस्था है विश्वास है पर कहाँ कब है नहीं पता है ईश्वर है विश्वास है मंदिर में,मस्जिद में काबा,कैलाश में घट घट कुम्भ में ईश्वर है आस्था है तीर्थंकरों ने ढूढा…

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चाह

चाह है आज कुछ लिखूँ तुम पर पर क्या कविता ,छन्द या दोहा कविता से भी सरस तुम मुक्तक से स्वच्छन्द तुम चाह है कुछ लिखूँ तुम मेरे प्रिय हो मुझे बडे अजीज…

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भ्रम का तिलिस्म टूट न जाय

कैसी है मोहब्बत का जादू टौटका सी लगती है आ जाए जब गिरफ्त में तिलिस्म सा लगती है तिलिस्म कैसा अनुपम राह भटका देता है चढ़ सिर पर चैन छीन लेता है इश्क…

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नींद हमारी ख्याव तुम्हारे

अलसाई अलसाई नींद में जब ख्याव तुम्हारा आ जाता है केवल तुम ही तुम होते हो याद तुम्हारी जगा जाता है प्रिय प्रियतम जब साथ तुम मेरे नींद में होते हो मैं सो…

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औकात

हरे बबूल पर छाई अमरबेल ने, जब पास सूखे ठूँठ पर लोकी की बेल को नित हाथों बढते देखा तो ,वो अन्दर ही अन्दर उससे ईर्ष्या करने लगी । एक दिन तो उससे रहा…

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इंतज़ार

"वो" धूप में खड़ा रहकर ताउम्र जलता रहा रात में जागकर नींदे उजाड़ता रहा कभी बस स्टॉप, कभी रेलवे स्टेशन पर मंड़राता रहा तो कभी डाक घर के आसपास टहलता रहा ना समय…

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प्यासा हूँ

प्यासा हूँ बहुत, व्याकुल हूँ प्यास से। साल का एक एक कंकर डाल रहा हूँ हर साल बड़ी आस से; इस उम्र के मटके में - की पानी की सतह ज़रा उभरें तो…

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प्रीत

गगन के दामन में , मिट के भी जो प्रीत की बदरी छाये वो प्रेम है बरखा का गगन से।। धरा के आँचल में चहक के जो नभ् की बून्द मुस्काये वो प्रीत…

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