याद आता वो मेरा गाँव…

मिट्टी में धंसते ये पाँव,याद आता वो मेरा गाँव। खेतों में फसलें लहरातीं,थी किसान का मन बहलाती,गेहूँ की थी जो ये बालियाँ,जैसे पनहारिन की गगरियाँ। ओस से गीले मेरे पाँव,याद आता वो मेरा…

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जाति धर्म

राजनीति का स्तर भी कितना गिर गया है विकासपुरी में डॉ पंकज नारंग को खुलेआम कुछ गुंडे उनके घर में घुसकर उनके ६ वर्ष के बेटे पत्नी और रिशतेदारों के सामने हत्या कर…

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स्वर्ग…. मेरी माँ की कोख में….!!

जन्मदिन पर माँ को समर्पित एक रचना - <><><><><><><><><><><><><> स्वर्ग.... मेरी माँ की कोख में....   काल चक्र का पहियाँ घुमा.. समय ने अपनी चाल बदली लेकिन अबसे बहुत पहले मेरी माँ की....कोख…

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” विरासत “

अब्बाजान के गुजरने के बाद मेरे हिस्से में जो विरासत आयी उसमें पुरानी हवेली के साथ बाबाजान की चंद ट्राफियाँ और मेडल भी थे जिन्हे अब्बुजान हर आने जाने वाले को बड़े शौक…

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अंधी नगरी

बौने पेड़ों के सब पत्ते चबा गयी बकरी।   माली भी ऊँचे पेड़ों को सींच रहा है अपनी कमजोरी पर कुढ़ता बौना पौधा। हरियाली बिन उसको सामाजिक छवि के हित गंदे नालों से भी करना पड़ता सौदा।   तना खीजकर रहा सुनाता सबको खरी खरी। बौने पेड़ों के सब पत्ते...   न्याय बंधा है दौलतमंदों के खूँटे पर खूँटे देकर पछताती हैं बेबस शाखें। नंगे पाँव नही आएगा कोई मिलने राह ताक कर थकी हुई हैं बूढी आँखें।   जूठे बेर फेंककर जंगल में बैठी शबरी। बौने पेड़ों के सब पत्ते...   अपना उल्लू सीधा करके निकले सारे आश्वासन की छाँव तले अँकुर फूटेगा। नयी कोपलें उग आयेंगी फिर पेड़ों पर लोगोँ का विश्वास एक दिन फिर टूटेगा।…

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भक्त भानुदास

भक्त भानुदास हर समय हरी भजन में लगे रहें रहते थे| उनके माता-पिता जब जाट जीवित रहे, भानुदास और उनके पत्नी-बच्चों का पालन - पोषण करते रहे , पर उनकी मृत्यु के बाद…

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कुछ कहना था

कुछ कहना था दो पल, बस दो पल साथ रहना था कुछ अधूरा मुकम्मल करना था थोड़ी अनचाही बातें थी एक अनकहा सच बेजुबां आँखों से सामना सबकुछ दुहराना था कुछ शब्दों की…

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नई सुबह

ये कभी-कभी यूँ होता है दिल खोकर भी कुछ पाता है कच्ची पगडण्डी बढ़ती है कोई मंजिल नई उभरती है हर आहट राग सुनाती है हर पल विश्वास जगाती हैn इन श्वेत-श्याम सी…

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