तिरंगा हम उठाते हैं

वतन पर मर मिटेंगे हम कसम यह आज खाते हैं लगा कर जान की बाजी तिरंगा हम उठाते हैं बढ़ाया हर कदम हमने सदा ही साथ में उनके मगर वो पीठ पर खंजर…

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मन

हे मन के चँचल परिन्दों बहुत दिनों मे आये तुम ।। तुम जो नहीं थे जड आँखों की सुखी थी दिल की डाल पर, कोई बसेरा डाल सका रात का सपना भूल गया।…

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मातृभाषा को समर्पित कुछ पल

अकस्मात् मस्तिष्क मे विचार आया क्यों न संकुचित विचारों को कुछ विस्तार दिया जाए इस प्रक्रिया हेतु हिन्दी वाचन का अभ्यास किया जाए इन्हीं विचारों में मग्न मैं चली जा रही अपने गन्तव्य…

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प्यार नहीं है

कहती हूँ प्यार नहीं मुझे उससे , पर क्यों परेशां रहती हूँ, कहती हूँ नहीं करनी मुझे उससे बातें, पर क्यों उसी के बातें सोचती हूँ , कहती हूँ, खुश रहो अपनी दुनिया…

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क्या लिखूं

क्या कुछ लिखें सब कुछ लिख चुका है पहले से ही हज़ारों साल के लेख अभी तक पढे नहीं गये समझ में आते नहीं लेकिन लिखना तो जारी है लिखना ही संसार का…

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विक्रमशिला विश्वविद्यालय : उपेक्षा का शिकार क्यों?

प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण विश्वादालयों में विक्रमशिला विश्वादालाया का एक महत्वपूर्ण स्थान है।यह नालंदा,तेलह!रा,तक्षशिला विश्वादालयों की श्रेणी में है।प!ल वंश के शाशन काल में निर्मित इस विश्वविदलाय के बारे में जानकारी हुमे तिब्बत…

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सोचो –जागो

प्यार प्यार ही कविता है तो जीवन का कोईमूल्य नहीं. जवानी में नहीं तोप्यार की बातें बुढापे में कैसे? ठीक है भाई, जवानी में केवल प्रेम की बातें ? ज्ञान कीबातें भीसोचना है…

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कितना पैसा

मधुर खिड़की के पास खड़ा बाहर देख रहा था। बाहर सुंदर-सुंदर मकान दिखाई दे रहे थे और बड़े-बड़े वृक्ष सड़क के दोनों के किनारे खड़े थे । मधुर इतना सब कुछ पा चुका…

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आखिर क्यों

अपनी ही दुनिया ख़राब करने वाले को मन , अपना समझता है, पूरा समंदर पार करने के बाद किनारे पर आकर दम निकल जाता है,आखिर क्यों खुद के संग फरेब करने वाले को…

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इश्क की राह

इश्क की राह में सबसे बडा नासूर यही है, जिन्दगी जहर सी जीने का दस्तूर यही है| दर्द खामोशियों में सहो इस कदर, ये सजा है मोहब्बत में सुरूर यही है||   फैसला…

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बिखरी- बिखरी

बिखरी बिखरी जुल्फें उसकी, बलखाती ये चाल, हाय! मेरा दिल जोरों से धडके, जैसे हो कोई भूचाल,   कोयल जैसी तेरी बोली, छेडे मन के तार, तेरी हर एक अदा में जानू कैसा…

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दूध भात

जब दुआरी के कटहल पर कौए ने नीर बनाया तो धनेसरी खूब खुश हुई थी । अब तो बडका समदिया घर के पास ही आ गया । पीरितिया के बापू उहां आने का…

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तिरुक्कुरल 2

तिरुक्कुरल —२. वान चिरप्पु —वर्षा की विशेषता। १, वर्षा के होने से संसार जी रहा है; अतः वर्षा अमृत-सम है; २. वर्षा अनाज और अन्य खाद्य -पदार्थों की उत्पत्ति करती है; प्यासे का…

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तिरुक्कुरल 1

धर्म —प्रार्थना –१ से दस तक तिरुक्कुरल तिरुवल्लुवर तमिल भाषा के साहित्य का सूर है. उनके तिरुक्कुरल का अनुवाद संसार की प्रमुख भाषा में हो चुका है. हाल ही में गुजराती भाषामें भी…

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सपना

मूषक राज दुलारे ने तो कुल का इज्जत ले डाला, बिल्ली राजकुमारी को भरी सभा मे ले भागा। चूहो ने पहले से कर रखी थी सारी तैयारी, शादी मे वनराज विराजे और कयी…

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