भारतीय इतिहास का बदलता स्वरूप

भारत :( ऐतिहासिक एवं वर्तमान दृष्टि में ) - जिस देश का इतिहास स्वर्ण अक्षरों में अंकित करने के लिये न जाने कितने महान व्यक्तित्वों ने त्याग, तपस्या,दान, पौरुष व ज्ञान का अदम्य…

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सोचो जरा

तीन बजने को थे. उसके आने का समय हो रहा था. मगर आज मुझे तसल्ली थी. बेचैनी नहीं. घर के बगल में साढ़े तीन फीट चौड़े गलियारे में मैंने पूरे सड़क तक कोई…

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अरेंज मैरिज

" बधाई हो आप बाप बनने वाले हैं । " सुनकर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा उमेश ने उत्साह से पूछा "कब " डॉक्टर मुस्कुराते हुए बोली " बस चार महीने और…

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एक कहानी

नानी एक कहानी सुना दो जल्दी से फिर मैं सो जाऊंगा सुबह सवेरे उठकर जल्दी फिर मैं अपने स्कूल जाऊँगा । कहानी में होती है बिल्ली रानी कभी होती है राजा रानी की…

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चाँद और सूरज

सूरज बोला चंदा से कल से दिन में तुम ही आना रात को मैं आ जाऊंगा तारों से मिलना है मुझको । रोज़ रोज़ बस तुम मिलते हो टिम टिम तारों से मिलना…

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देश भक्त/पार्टी भक्त

एक पार्टी से दूसरी पार्टी के कार्यालय में फोन पर बातचीत~ -"अरे, जनता बहुत हल्ला मचा रही है ऊँट पुल के निर्माण के लिए अब इसे टालना मुश्किल हो रहा है।" -"हुज़ूर, चुनाव…

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ऐ मेघा

जमीन जल चुकी है आसमान बाकी है। सूखे कुँए तुम्हारा इम्तहान बाकी है। बरस जाना इस बार वक़्त पर ऐ मेघा …. किसी का मकान गिरवी है , किसी का लगान बाकी है।…

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प्रेम-पत्र

मेरी प्यारी बेटी, दीपिका, तुमने मुझसे कई बार कहा था कि पापा आप मुझे लव लेटर लिखना सीखा दीजिए। आप तो एक राईटर हैं। भाषा पर तो आपकी जबरदस्त पकड़ है। आपके लिये तो लव लेटर लिखना बाएं हाथ का खेल है। तुम्हे तो याद होगा कि हम दोनों के बीच दोस्ताना सम्बन्ध रहे हैं। मैं जब तुमसे पूछा करता था। कि तुम लव लेटर लिखना सीखने के बाद किसे लिखा करोगी तो तुमने बडे़ ही खिलंदड़पन के साथ कहती थी कि पापा मेरे सबसे बडे़ प्रेमी तो आप ही हैं। मैं आपसे ही लव लेटर लिखने की शुरूआत करूंगी, और खिलखिला पड़ी थी।

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दिल ढूँढ़ता है

मँझधार में फँसकर किनारों को ढूँढ़ते हैं पतझड़ के मौसम में बहारों को ढूँढ़ते हैं। दिल ढूँढ़ता है उसे जिसे पाना नहीं आसाँ, क्या-क्या जतन किया बताना नहीं आसाँ। छूने को तेरा साया…

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एकांत योगी

सुनो…..! यूँ ही नहीं सुर निकलता कोई बिना दर्द के पिघलता कोई दर्द का तार छिड़ता है तो शिद्द्त से गिटार बजता है तपस्या होती है साधना होती है यूं ही नहीं कृष्ण…

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विद्रोह

मैं अंधेरों के विरुद्ध विद्रोह की घोषणा करता हूँ तुम सब अपनी हथेलियों पे रोशनी की वक एक किरण लेकर मेरे साथ चलो हम अपने हाथों से एक नया सूर्य उगाएँगे । लेखक…

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तलाश एक दास्तान

मैंनें ढूंढा तुम्हें, सारी उम्र भर, इस पार से उस पार तक, इक अथक तलाश जारी है, घर के आंगन से स्वर्ग के द्वार तक,   सारी जिन्दगी आशाओं की मीनार बन के…

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जब भी कविता लिखती हूँ

जब भी कविता लिखती हूँ जाने क्यों मेरा कवित्व मर जाता है एक आम सा अदना इंसान मेरे भीतर भर जाता है जिसे न तो काव्यांगों का ज्ञान है न रूपकों ,अलंकारों का…

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क्या नसीब है?

बाहर ताली, घर में गाली क्या नसीब है? हर अपना हो गया सवाली क्या नसीब है?? . काया की दुश्मन छाया, कैसी माया है? अपनों से ही धोखा पाया क्या नसीब है?? .…

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जीने की तमन्ना

अब जीने की एक ही तमन्ना है तिरंगा मेरा कफन हो जान चाहे जहाँ निकले मेरी लाश भारत में ही दफन हो हर धर्म के लोग रहें यहाँ आपसी मेल और मोहब्बत से…

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