सुबह वाला चाँद…

वही गगन है वही पवन है मगर ये कौन है जो है उदास हैरान परेशान…… क्या मैं देख रही हूँ मेरा सुबह वाला चाँद मैंने पूछा चाँद दिन में तुम यहाँ क्या करते…

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बचपन-बुढ़ापा थे कभी वारिश… अब लावारिश…

‘‘ लोे जी जमकर खुशियां मनाओं कान्हा घर आया है आपके।’’ नर्स की आवाज सुन सब नाचने लगे।कान्हा के स्वागत में थाली बजाकर पड़ोसियों को सूचना दी गई।लड्डू बांटे गए अभी भी थोड़े…

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बिस्तर ताले में बन्द हो गया

छोटा बेटा था मैं हाँ सबसे छोटा जिसके बालों की चाँदी को अनदेखा करके किसी ने बच्चा बनाए रखा था जिससे लाड़ था प्यार था दुलार था कि आदत जिसकी हो गई खराब…

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नाम पूछते हैं

वो कत्ल करने से पहले मेरा नाम पूछते हैं नाम में छुपी हुई कोई पहचान पूछते हैं। शायद यूँ करके ही ये दुनिया कायम है जलाकर घर मेरा वो मेरे अरमान पूछते हैं।…

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आईना मगर सब कहता है

कर जो-जो तू चाहता है कि मुक्कमल जहाँ में तू रहता है। हसरतें तेरी आसमानी हैं कि सब कुछ तू, तू ही चाहता है। जमीं आसमां एक करता है आसमां मगर जमीं पर…

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शूकून अपना ढ़ूँढ़ता हूँ मैं

जिन अंधेरों से बचकर भागता हूँ हमदम हैं वो मेरे। जिनके साथ हर पल मैं जीता हूँ और मरता भी हूँ हर पल कि आखिरी तमन्ना हो जाए पूरी। मगर वो तमन्ना आज…

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प्रभू

गर्भ से सुरक्षित बच आने के बाद इस धरा पर मुझ जैसी नन्हीं-सी बच्ची का जन्म लेना क्या सार्थक हो पाएगा… अथवा, किसी साथी या, जीवन साथी या, किसी पथ के साथी के…

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जनहित सन्देश : मनहरण कवित घनाक्षरी

हाल ये न कल रहे,आज जो है चल रहे, बनके इंसान थोडा,फर्ज भी निभाइए । पेड़ सब जल रहे,फिर कैसे कल रहे, यही सब सोच सोच,पेडो को बचाइये । धरती पे फ़ैल रही,गंदगी…

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रचनाकार

मैं क्यों लिखता हूँ   ?? मन के भावों ,विचारों का शब्दोंमें संगुम्फन असम्भव नहीं तो दुरूह कार्य तो है ही । लेखन चाहे गध हो या पध अथवा अन्य कोई विधा । समाज…

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परदा

परदा बडा आसान गाम्भीर्य भाव जहाँ देखो परदा शब्दों के हेर फेरमें छल प्रपंच में पार्टी पाॅलिटिकल्स मे सब जगह परदा लाज बचाने का साधन मर्यादा का इज्जत बचाने को सब ओर परदा…

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लाली

आज मुन्नी ने खाना नहीं खाया। रो-रोकर घर भर दिया। रोती भी क्यों नहीं, इतने प्यार से जो पाला था उसने लाली को और आज न जाने कौन से जन्म का बदला लेकर…

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तूलिका
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तूलिका

“अरे...यह क्या कर रहे हो...छोड़ो न...” “कुछ नहीं...सच तो यह है कि तुम्हारी इन लटों को सुलझाना...उफ्फ जाने क्या हो जाता है मुझे तुम्हें इस रूप में देखकर…” “हटो भी...हर समय मुझे छूने…

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हमसे है हरियाली

हम नन्हें तरू है , हमसे है हरियाली मत काटो हमको , हमसे है हरियाली पादप काटोगे बढ़ जायेगी गर्मी हमको न जलाओ हमसे है हरियाली पी गये धरा का सब जल काट…

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दो जून की रोटी

काल के कालांतर का रहस्य है शमशान, जीवन मृत्यु का उदगम स्थान है शमशान । हर तरफ चिता दहकती है और भस्म ही भस्म उडती है, जीवन के कडवे सत्य कि ज्ञान यहाँ…

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चाँदी का गिलास

“सर नमस्ते...।” “कौन?” “सर...मैं हूँ...अमित...अमित खन्ना...क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ?” किवाड़ खोलकर अन्दर घुसते हुए वह बोला। “आइए...पर...मैंने आपको पहचाना नहीं,” प्रोफेसर गुप्ता ने कहा। “सर...मैं आपका पुराना छात्र हूँ...मैं, मनोज, शीला,…

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