मेरे प्रेम गीत

रात ढलती रही , शम्मा जलती रही तुम गुनगुनाते रहे , हम मुस्कुराते रहे चाँद ने पहरा, हम पर बराबर दिया जुगनुओं ने आँचल को, रोशन किया घड़ी वक्त की , टिकटिकाती रही…

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मरघट

एक मरघट हैं मेरे अंदर, जहां चिता जलती रहती हैं, मेरे कुछ स्वपनों की, कुछ स्मृतियों की, कुछ विशेष रिश्तों को बांधे रखनें वाली उन कच्ची डोरियों की, और यह निरंतर जलती रहती…

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अर्पित

आज मैं खुश हूं बहुत खुश हूं दर्पण भी सहमत बहुत खुश हूं रोई नहीं पिछली कई रातों से सोई नहीं ख्वाबों की बरसातों में लबों पे मुस्कान की कली खिली है धूप…

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हमारी दोस्ती

बीज से दरख्त बन गई हमारी दोस्ती जमीं पे सूरज तो कभी चाँद बन चमक गई हमारी दोस्ती गले में जो पड़े बाहों के हार तन की राह मन से मिलने चली हमारी…

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काल कोठरी

एक ख्याल श्याम रंग दूजा ख्याल श्वेत रंग दोनों दौड़ रहे अन्तर्मन में रंगों की रेखा कहीं नहीं दोनों दौड़ रहे बेरंग एक दिन के उजाले में एक रात के अंधेरे में दोनों…

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दहाड़

पेन्सिल की छाल है शार्पनर सी चाल है बंद गली की दीवार के रंग से मिलती पीठ दिखाती एक पेंटिंग सी चलती एक शेरनी की खाल के प्रिंट की फ्रॉक पहने एक लड़की…

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सोभावती छंद (हिन्दी भाषा)

सोभावती छंद (हिन्दी भाषा) देवों की भाषा से जन्मी हिन्दी। हिन्दुस्तां के माथे की है बिन्दी।। दोहों, छंदों, चौपाई की माता। मीरा, सूरा के गीतों की दाता।। हिंदुस्तानी साँसों में है छाई। पाटे सारे भेदों की ये खाई।। अंग्रेजी में सारे ऐसे पैठे। हिन्दी से नाता ही तोड़े बैठे।। भावों को भाषा देती लोनाई। भाषा से प्राणों की भी ऊँचाई।। हिन्दी की भू पे आभा फैलाएँ। सारे हिन्दी के गीतों को…

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सुजान छंद (पर्यावरण)

सुजान छंद (पर्यावरण) पर्यावरण खराब हुआ, यह नहिं संयोग। मानव का खुद का ही है, निर्मित ये रोग।। अंधाधुंध विकास नहीं, आया है रास। शुद्ध हवा, जल का इससे, होय रहा ह्रास।। यंत्र-धूम्र…

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करवा चौथ पर आरती

करवा चौथ पर आरती ओम जय पतिदेव प्रिये स्वामी जय पतिदेव प्रिये। चौथ मात से विनती-2 शत शत वर्ष जिये।। कार्तिक लगते आई, चौथ तिथी प्यारी। करवा चौथ कहाये, सब से ये न्यारी।।…

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समझ

बात समझ आई दिल ने कही थी दिल ने सुनी थी मां की दुलार सी एक प्रीत की पुकार समझ आई कहना है जो दिल खोल के कहो मैं सुनूंगी राज तुम्हारे दिल…

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ख्वाहिशें

पानी में डूब रही हैं मेरी ख्वाहिशें मुझे एक सूरज की तरह ऐ आसमां तुम अपनी बाहों में उठा लो एक किश्ती सी तैर रही जल की सतह पर मेरी लहरों सी उठती…

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