इतिहास के क्षितिज में विलीन कविता

कविता समुद्र  नहीं जिसपे जहाज़ लंगर डाल ले.. कविता किसी पेड़ से अलग हुआ पत्ता नहीं जिसे हवा अपनी झाड़ू से बुहार दे.... कविता किसी मेहनती किसान की बनियान का स्वेद भी नहीं,…

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((( माँ एक अनुभूति )))

माँ एक अनुभूति सारी दुनियाँ के कवियों से भी, और बड़ी हो जाती है, माँ... ! स्वयं लिखी लोरी को जब, अपनी ही धुन में गाती है। सारी दुनियाँ के कवियों....॥ इसके ही…

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रहने दे मनमीत…

कविता - मनमीत मेरे हाथ में तेरा हाथ रहने दे मनमीत. मुझे अपने पास-साथ रहने दे मनमीत. माना मैं तो हूँ उन्मुक्त पवन का झोंका, मुझको भी हवा संग बहने दे मनमीत. तेरे…

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स्नेह बन्धन

स्नेह बंधन बचपन में जिस सूखी रेत पर खेला करता था। उस रेत की गर्त  में, स्नेह के समन्दर को पाने की चाहत, सपना था मेरा। उस सपने को मन में संजोये बचपन…

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मेरे अल्फाज

1मैं जितनी बार टूटता हूँ उतनी बार जुड़ता हूँ, हा जिंदगी मैं फिर भी तुझसे लड़ता हूँ 2ऐ जिंदगी तुझसे हारा नहीं हूँ मैं थका हुआ हूँ, मगर रुका नहीं हूँ मैं

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उजालों के भी

उजालों के भी काले साये होते हैं और परछाईयों के भी रोशनियों के घरबार यह तो अपनी अपनी नजर है अपनी अपनी सोच मानो तो सब एक है न मानो तो सब पृथक…

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तस्वीर नहीं बन पा रही

तस्वीर नहीं बन पा रही बेशक हाथों पे रंग लग गये हैं मन के दर्पण में जड़ी तस्वीर को ड्राइंग शीट पे उतारना मुश्किल प्रतीत हो रहा है मन के भाव सच्चे हैं…

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मैं और मेरा मन

वादियां खामोश हैं और हम भी खामोश सुबह का आलम है और सारा जहां सो रहा फूल हवाओं में लहरा रहे बादलों के टुकड़े आसमान में छा रहे तालाब का पानी भी स्थिर…

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एक गुजारिश है

एक गुजारिश है फिजा में बिखरी खुशबूओं मेरी बाहों में समा जाओ मेरे सीने से लिपट जाओ मैं एक गहरी नींद से सुबह सुबह जागा हूं मेरे ख्वाबों में रंग भरो उन्हें जमीन…

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सड़कें यूं उदास तो न थीं …!!

डगर - डगर कोरोना कहर पर खांटी खड़गपुरिया की चंद लाइनें .... सड़कें यूं उदास तो न थी ....!! तारकेश कुमार ओझा ---------------------------- अपनों से मिलने की ऐसी तड़प , विकट प्यास तो…

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माँ तुम हो…

माँ तुम हो.... माँ मेरे लिए केवल तुम हो. वर्ना मैं जैसे भीड़ में गुम हो. माँ तुमसे सुकून के साये में हूँ. सुरक्षित और आवृत^ छाहे^ में हूँ. (ढ़का हुआ,मौसम -ऋतु-छाया) माँ…

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माँ मुझे….

माँ मुझे हे माँ मैंने देखे हैं तेरी आँखों से झरते आँसू जो पिता के लड़खड़ाते क़दमों के दहलीज के भीतर आते ही भर आए थे तेरे नेत्रों में. और जिन्हें तूने समेट…

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तेरा चेहरा ज्यों गुलाब

कविता - गुलाब हमसे इतना भी क्या इताब^.(गुस्सा ) थोड़ा सा हटादो हिज़ाब^.(घूंघट) ज़ालिम तेरी जवानी, क़यामत तेरा शबाब. तेरा चेहरा है ज्यों गुलाब. मखमल सा जिस्म देखकर बदला है ये दोआब. मलमल…

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मदिरा सेवन

मदिरा सेवन मदिरा मदिरा सब करते हैं कोई भूखे को रोटी दिया? मदिरा - मदिरा सब करते हैं मां की आंसू न आने दिया?... मदिरा - मदिरा सब करते हैं भाई को भाई…

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इश्क़-ए-हाल

तुम्हें आज़ादी मुबारक मुझे हाल-ए-गम मुबारक हाल-ए-इश्क़ ने बेहाल कर दिया मुझे बहुत दिल ने परेशान कर दिया मुझे इश्क़ का डोज दिया उसने मैंने हल्का घुमारी ला दिया मुझे मोहब्बत का जुनून…

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