सबसे आगे

सोच रही हूँ मैं, इस नई सुबह पर, चंद लाइनें उपहार स्वरूप लिख दूँ, अनुभव पत्रिका तुम्हारे लिए। जो जीवन के धरातल पर, उतरी हो नई सुबह सी, पहली किरण की तरह, नई…

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खत एक फौजी का

माँ डरना नहीं मैं महफूज हूँ तेरा लाल बहादुर है सिर कटा लेगा मगर आँचल कभी तुम्हारा दाग होने नहीं देगा जिस तरह आपने बाबूजी के शहीद होने पर मुझे देश के लिए…

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बहुत याद आते हैं

जो मैं इन कदमों को ज़रा सा पीछे लेलूं तो बीते हुए कुछ सफर आज भी बहुत याद आते है। मैं उस गुजरे हुए कल को ज़रा टटोलूं तो कुछ गुजरी हुई हसीन…

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चलो घूम आयें

सर्दी का मौसम ये सर्द हवाएं सुबह-सुबह आओ चलो घूम आयें निकलता ये सूरज लगे प्यारा प्यारा झील का किनारा लगे न्यारा न्यारा ठण्डे पानी को आओ गरम कर आयें सर्दी का मौसम…

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मर्यादा

मर्यादा मे रहो, बंधन मे रहो, स्वभाव से नम्र रहो, संयम मे रहो, घुंघट मे छुपी रहो, लज्जा से भरपुर रहो, नजर झुकाकर रहो, हर दर्द को हंसकर सहो। जहर पीकर मीठा बोलो,…

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ठिठुरती भोर

सिकुड़ रही है कुदरत सारी, ठण्डी ठण्डी लहरों से। भोर ठिठुरती देख गगन से, सहलाता रवि किरणों से। बिछा गयी है रात अँधेरी, तुहिन बिंदु कुछ तिनकों पर। उषा काल में चमक उठे…

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फैसले की घड़ी

मिली नज़रें उनसे तो समझा इबादत हो गई। देखते ही रह गए और उनसे मुहब्बत हो गई।। तरसते थे दो मीठे बोल सुनने को हम। सियासत दिल पर की और हुकूमत हो गई।।…

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हेनन और मैं

इस गाँव की कोई यादें नहीं है। यादें नहीं हैं क्योंकि बाशिंदे नहीं हैं। बाशिंदे नहीं हैं, इसीलिये यादें भी नहीं हैं। फ़लसफ़ा नहीं है, मोजज़ा नहीं है, तकल्लुफ़ नहीं है, हया नहीं…

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नववर्ष के आगमन पे

समय का पहिया 365 दिन घूमकर फिर नववर्ष की पहली तारीख पर आकर टिक जाता है एक बार फिर भरपूर उमंग के साथ पूरी गति से वही भूली बिसरी यादों को उसी पुराने…

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हिमाचल का गौरव

समाधिस्थ यति के सदृश हिम प्रान्त के शिखर यहां छ्ल-छ्ल करती सरिताएं काल चक्र पहिये से यहां ऋगवेद की सृजन धरा यही आकाश गंगा सी पावन नीर शिखर पर खगोल सी सुमता ऋषियो…

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गाँव और शहर

हद है हर शहरी गाँव को कोसे, उसे कहाँ पता शहर की जननी गाँव ही तो है। और जहाँ बसे भारत माँ वो गांव ही तो है जहाँ मिले संस्कृति, सभ्यता भाईचारा का…

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प्रदूषण

दिल्ली हुई काली, क्या अब देश की बारी!!! देश की राजधानी दिल्ली की आबोहवा में ज़हर घुल गया है, दिल्ली गैस चैम्बर बन चुकी है। ऐसी सुर्खियां हर सर्दियों के मौसम में समाचार…

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युग पुरुष

बलशाली का शौर्य कहो, क्या छिपता है? उसके स्वेद-बिन्दु से ही, प्रस्तर भी पिघलता है। जिसमें अग्नि सा तेज न हो, वह सूर्य कहां कहलाता है। जिसमें ध्वनि की कोई गूंज न हो,…

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नव वर्ष

नव वर्ष मंगलमय हो! न निराशा ना भय हो, हर चेहरे पर मुस्कान रहे, ज्ञान का सूर्य उदय हो। सबका एक सवेरा हो, ना कोई मेरा-तेरा हो, इक दूजे का साथ मिले, भारत…

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