Anuradha Sharma 2018-01-14T15:26:11+00:00

Anuradha Sharma

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    क्या दोष था मेरा क्यों गई ठुकराई मैं ? चल दी थी साथ तुम्हारे तोड़... Read More »
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    नेहा भागे भागे घर के भीतर आती है।उसकी सांसे मानो रेल कि इंजन कि तरह... Read More »
  • भूख

      कितना तड़पाती है कितना ललचाती है पशुओं कि भाँति मुँह से लार टपकाती है... Read More »
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    …..मजदूर… सुर्ख आँखें ताकती है उस चूल्हे को जिसमें आग नहीं सुलगी है सिर्फ राख... Read More »

 

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