Chandramohan Kisku 2018-01-14T15:26:11+00:00

Chandramohan Kisku

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  • हुल के फूल

    हुल के फूल घिरे चारदिवारी के अंदर खिलते नहीं है वह तो तुम्हारे और मेरे... Read More »
  • दुःख होता है

    चन्द्र मोहन किस्कु दुःख होता है *********** यह धरती यह सुन्दर धरती दो भागों में... Read More »
  • चिड़ियाँ

    चिड़ियाँ चन्द्र मोहन किस्कु उड़ती चिड़ियाँ को जरूरत नहीं पड़ती उड़ने के लिए लाईसेंस उड़... Read More »
  • अब भी

    अब भी …. .चन्द्र मोहन किस्कु श्रेष्ठ होने की चाहत और बुद्धि के बल पर... Read More »
  • कविता की पेड़

    कविता की पेड़ बड़े होने के लिए जरूरत नहीं पड़ती उर्वरा मिट्टी की रसायनिक खाद... Read More »
  • युरेनियम  की विकिरण 

    सागर की अस्थिर पानी जैसी उबल रहा है मेर मन आज बोलने के लिए मजबुर... Read More »
  • महुआ चुनती लड़की

    महुआ चुनती अपनी गीत में ही मस्त हुई लड़की जब हँसती है तो गिरता महुआ.... Read More »
  • पेड़ -लताओं के हुल

    अब जंगल -पर्वतों में पलाश फूल खिला है लाल अति सुन्दर जैसे कोई हुल का... Read More »
  • मेरी स्वप्न पर

    मेरी फूटी छज्जा पुआल की झोपडी में खजूर पाटिया फटा गद्धा पर लेट कर तकते... Read More »
  • हमारा खून

    वे जमीन लुट रहे है घर से बेदखल कर रहे है कह रहे है ——-... Read More »