Gautam Sagar 2018-01-14T15:26:11+00:00

Gautam Sagar

जन्मतिथि:
November 30, -0001
विधाएँ जिसमें आप लिखते हैं :
ग़ज़ल, लघु-कथा, कहानी, गीत, लेख, आदि
पत्रिका, किताब, समाचार पत्र ( जिसमें रचनाएँ आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई ):
Hindi Pratilipi , BOB maitri, prabhat khabar , Baroda Darpan, etc
संक्षिप्त परिचय:
नाम :- गौतम कुमार सागर वडोदरा ( गुजरात) आयु :- 38 वर्ष लेखन कार्य :- विगत बीस वर्षों से हिन्दी साहित्य में लेखन. दो एकल काव्य संग्रह प्रकाशित . एक लघु कथा संग्रह , तीन साझा संकलनों में रचनाएँ प्रकाशित . विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित . अखिल भा
सम्मान :
अखिल भारतीय स्तर पर \" निबंध , कहानी एवं आलेख लेखन \" में पुरस्कृत.

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  • टॉयलेट : एक प्रेम कथा  उर्फ कलुआ

    “हैरी मेट सेजल” का  फ्लॉप होना , दर्शकों का थियेटर  से गालियां देते हुए निकलना  तथा लंबे  वीकेंड के आस पास  टॉयलेट एक प्रेम कथा का सिनेमाकी रजत पर्दे पर आना और हिट हो जाना यह  भारतीय सिनेमा के लिए शुभ शगुन है. अरबपति और अवार्ड विनिंग अभिनेताओं , निर्माताओं , निर्देशकों  के लिए एक करारा जवाब भी है कि कब तक कनाडा , यूरोप , स्विट्ज़रलैंड में“इडिओटिक फॅंटॅसी”  गढ़कर  पब्लिक को  फूल बनाते  रहोगे. कभी क..क..क… किरण , कभी सिनॉरीटा , कभी अंजली -अंजली कह कह कर बाहें फैला -फैला  कर खूब “माल” और “पुरस्कार” बटोरे. अब वेघिसी -पिटी स्टोरी का दौर गया . मगर अपने अक्की भाई ( अक्षय कुमार ) ने पब्लिक की नस पकड़ कर रखी  है और हेरा फेरी के बाद से  साल में दो से तीन फिल्मों के  हिट  देने केफ़ॉर्मूले  की जो आदत पकड़ी है वह अभी तक बरकरार है . हाल के वर्षों में “जॉनी एलएलबी” हो “गब्बर” हो , “हॉलिडे” हो या “एअर लिफ्ट”    . माहौल जब  देशभक्ति का हो तो हॉलीडे और एयर लिफ्ट चलपड़ती है . अपाहिज सिस्टम से लोग बेहाल होकर , करप्शन के खिलाफ सड़कों पर निकलते है तो  गब्बर चल जाती है. अक्की भाई बड़े इज़्ज़त औरएहतराम से  जोली एल एल बी बनकर ज्यूडिशियरी पर पंच दे डालते हैं. आज कल  देश में  “प्रधान सेवक”  की हवा बह रही है . गांधी बापू के गोल चश्मे पर स्वच्छ भारत दिख रहा है. डर्टी पिक्चर वाली “विद्या बालन “शौचालय की सरकारी ब्रांड आंबेसडर बनकर ” शौचालय बनवाए ” का संदेश दे रहीं हैं. अपने अक्की  भाई भी इस नेक काम  में कहाँ पीछे रहने वाले थे . मुद्दे को ” रॉडी राठौड़” की तरह लपका और “एंटटेरमेंट” की तरह तैयार . बड़ेछुपे ” रुस्तम ” हैं अपने ऐक्शन कुमार . इस बार भी  अपने तरकश से ऐसा तीर निकाला  कि कोई इस सब्जेक्ट पर पहले सोचा भी नहीं था . टॉयलेट…..एक ऐसा शब्द जिसे हम  पब्लिक में चर्चा करना भी वियर्ड समझते हैं. मगर आजकल हर कोई एक दूसरे से पूछ रहा है -“छुट्टियों मेंटॉयलेट  देखी क्या ?” “मैंने तो देखी …..और तुमने ?” बच्चे समझ नहीं पा रहे हैं कि  पेरेंट्स साथ साथ ” टॉयलेट” जाने का प्रोग्राम क्यों बना रहे हैं. बॉय फ्रेंड – गर्ल फ्रेंड  एक साथ ... Read More »
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