प्रेम प्रकाश2018-02-25T19:25:20+00:00

प्रेम प्रकाश

शिक्षा :
स्नातकोत्तर
विधाएँ जिसमें आप लिखते हैं :
कविता, शेर
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  • शायरी

    तू मेरी जीने की सबब हो! तू चली गई ज़िन्दगी रूठ गई!! Rate this item:1.002.003.004.005.00Submit... Read More »
  • कविता

    मै एक मात्र पेड़ हूँ!! मैं आपको दूषित हवाएं से बचाते आया हूँ!! मैं आपको... Read More »
  • कविता

    आज मन करता है। किसी के ख्वाब का शाहज़ादा बन जाएं। आज मन करता है... Read More »
  • शायरी

    क्या कहें उनके इश्क में कुर्बान ही गए , और मुस्कुराते हुए कहते है इश्क... Read More »
  • शायरी

    लौट आता हूँ हर रोज़ उसके दराबर से ना जाने कौन से ऊंचाई पर रहता... Read More »
  • शायरी

    मोहब्ब्त की समा जलाए रखे थे! ये कैसी हवा चली समा बुझ ही बुझ गया!... Read More »
  • पत्र लिखता हूँ

    रोज एक पत्र लिखता हूँ।। पढ़ता हूँ फिर लिखता हूँ।। फिर सोचता हूँ फिर फाड़... Read More »
  • शायरी

    कहतें है लोग प्यार और जंग में सब सही है, मैं कहता हूं प्यार में... Read More »
  • कविता

    जब मैं पहली बार वर्धा आया। देखा परियों का मेला उसकी। उसकी आँखों में चाहता... Read More »
  • शायरी

    प्यार से बड़ा कोई रोग नही | जब लग जाएं तो कोई दवा उसके योग... Read More »

 

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