Jai Ram Rai 2018-02-25T19:25:20+00:00

Jai Ram Rai

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  • काबिल

    अपनी मनपसंद गजल :- वो तो काबिल थे सही का शुमार कर लेते। मेरी गलती... Read More »
  • अपनों के जख्म

    हमारे जख्म दिल पर हैं दिखाये जा नहीं सकते। मिले हैं वो भी अपनों से... Read More »
  • उतरी हुई नदी।

    दिये गये मिश्रे पर एक गजल :- अपने होठों को हम हिला न सके। बात... Read More »
  • खबर करना

    गिरहबन्द गजल :- याद आये हैं वो लम्हें जो गुजर कर आये। रफ्ता रफ्ता मेरे... Read More »
  • गजल

    उनवान ‘गजल, पर एक गजल देखें :- हँसते हँसते अगर येे आँख सजल होती है।... Read More »
  • गरीबी एक अभिशाप।

    चित्र लेखन 23-05-2018 विधा-गजल:- तुम अपने को धनवान भी रहने दिये होते। गरीबों को तुम... Read More »
  • खंजर का मंजर।

    जब हमें खौफ का मंजर दिखाई देता है। ख्वाब में भी हमें खंजर दिखाई देता... Read More »
  • यारी

    गुनाह कुछ भी नहीं फिर भी सजा सारी है। बता दो जिन्दगी ये हाल क्यों... Read More »
  • मुफलिसी

    रदीफ निभाइये के अन्तर्गत :- राहबर जब मेहरबान हो जायेगा।। तो सफर मेरा आसान हो... Read More »
  • देखा है

    मैंने ख्वाबों का एक ऐसा जहांँन देखा है। जैसे बंजारे ने अपना मकान देखा है।।... Read More »

 

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