pushkarji78 2018-01-14T15:26:11+00:00

pushkarji78

जन्मतिथि:
November 30, -0001
विधाएँ जिसमें आप लिखते हैं :
ग़ज़ल, कविता, मुक्तक, शेर, लघु-कथा, कहानी, आदि
पत्रिका, किताब, समाचार पत्र ( जिसमें रचनाएँ आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई ):
अमर उजाला काव्य
संक्षिप्त परिचय:
बी.सी.ए.,एम.बी.ए., घर में हिन्दी का माहौल होने के कारण लेखन में रुचि।

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  • वो बूढ़ा बरगद

    था मेरे गाँव में एक बूढ़ा बरगद, छाँव में बैठ दादा होते थे गदगद। पुरे गांव का किस्सा पता था जिसे, कौन सच्चा कौन झूठा पता था उसे। उसी के छाँव में बैठ रिश्ते बना करते थे, दुःख-सुख सब एक दूसरे की बयां करते थे। पीढ़ी दर पीढ़ी जहाँ खेल कूद बड़े हुए थे, सालो से रस्सी के झूले जहाँ लगे हुए थे। लेकिन अब न झूला है न वो छाँव, वीरान सा हो गया जैसे मेरा गांव। गुजरी है उसके वजूद से सड़क चकचक, कितनी यादों को ले दफ़न हो गया वहीं- वो बूढ़ा बरगद। -निर्भय। Rate... Read More »

 

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