Sanjay Sharma 2018-02-25T19:25:20+00:00

Sanjay Sharma

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  • प्रेम और पश्चाताप

    अपने कॉलेज की पढ़ाई खत्म होते ही प्रेम ने पिता के कारोबार की तरफ अपना... Read More »
  • शादी का बजट

    सुबह से ही शर्मा जी के घर में भागदौड़ का माहौल था। आज उनकी एकमात्र... Read More »
  • मेरा यार बसा परदेश

    मेरा यार बसा परदेश किससे कहूँ मैं संदेश आँखें हैं ढूंढे उसे जो भूला जाय... Read More »
  • देखते देखते

    दिल तेरा हो गया देखते देखते क्या से क्या हो गया देखते देखते॥ तूने तीरे... Read More »
  • याद

    दिल में उमंग है तो जीवन में रंग होंगें जीवन में रंग हो तो दुश्मन... Read More »
  • काश मैं वृक्ष बन जाता….

    कोई संत करके दया, छोटा सा बीज उगाता देकर पानी खाद उसे, पौधे से पेड़... Read More »
  • ग़र मिलती हमें मुमताज

    कहते हैं तुमसे आज, बयां करते हैं दिल का राज। ग़र मिलती हमें मुमताज तो... Read More »
  • दादी और रक्षि – १ (दादोसा)

    ”रक्षि!” सो जा बेटी दिनभर से खेल रही है, अब तो सो जा । अभी... Read More »
  • यादों के झरोखे – 2

    ।।1।। यादों के झरोखों में किसी की याद पलती है, इन चाहत की राहों पर... Read More »
  • गाँधी से मुलाकात

    मन में लेके स्वच्छ छवि, निकला घर से जब निकला रवि । गया मन खुशियों से खिल, जब पहुंचा भारत के दिल । नई दिल्ली की देख स्वच्छता,  मन मेरा प्रसन्न हुआ पर बाकी जगहों पर मुझको, कूड़े का अम्बार मिला । आश्चर्य बड़ा था, जहाँ कूड़ा पड़ा था, वहाँ गाँधी जी भी रोते दिखे भारत माँ का मैला आँचल, अपने आँसू से धोते दिखे... Read More »

 

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