sushil sarna 2018-02-25T19:25:20+00:00

sushil sarna

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  • रूठ के …

    जीत छीन लो हार न छीनो। जीने का अधिकार न छीनो। अंगार मुझे दो चाहे... Read More »
  • सुधि मेघ …

    तड़प उठी साँसों की बदरी भीग उठी नयनों की नगरी चीखा फिर शृंगार हिया का... Read More »
  • काहे न आये …..

    काहे न आये ….. भोर गए तुम अब तक न आये मोरे पिया कछु समझ... Read More »
  • हर शै …

    हर शै …   तारीकी में भी इक तनवीर निहां होती हैl ख़्वाब-ए-जागीर तसव्वुर में... Read More »
  • 1.स्पंदन…./2.दृग शर …

    1.स्पंदन…. झुकी नज़र रक्ताभ अधर …हुए अंतर्मन के भाव प्रखर ……घोर तिमिर में स्पर्श तुम्हारे... Read More »
  • तुम्हारी कसम …

    तुम्हारी कसम … सच तुम्हारी कसम उस वक़्त तुम बहुत याद आये थे जब सावन... Read More »
  • सुर्ख आरिज़ों पे ….

    सुर्ख आरिज़ों पे  सुर्ख आरिज़ों पे गुलाब रखते हैं …वो चिलमन में शराब रखते हैं... Read More »
  • पीते हैं …

    पीते हैं …   सब कुछ न कुछ पीते हैं //   रजनी सांझ को... Read More »
  • अंगड़ाई …

    अंगड़ाई … शब् है शबाब है वो भी बे-हिज़ाब है …….गेसुओं से झांकता जैसे माहताब... Read More »

 

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