कुछ पढने को दो…2018-02-11T17:10:39+00:00

और मय

By |May 16th, 2017|Categories: कविता|

मैं होश में था,फिर क्यों मदहोंश हुआ रै। होठों ने मेरे उसके फिर क्यों?लबों को छुआ रै। रोका [...]

अतीत

By |October 26th, 2017|Categories: कहानी|

कहानी (अतीत) दीपावली आने वाली थी। बस सफाई करने में लग गयी थी। आज पति के आफिस का [...]

जिसको हमनें समझ बैठा…

By |October 24th, 2018|Categories: कविता, व्यंग्य|Tags: , , |

ये मेरे मालिक कैसा-कैसा और दिन दिखायेगा तूने ऐसी क्या हमसे करवाना चाहता है ये मालिक

वो दिन आप को याद कैसे दिलाये

By |November 1st, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |

तुमने कहा था गले से मुझको लगाकर सदा के लिए हम एक हो...