कुछ पढने को दो…2018-02-11T17:10:39+00:00

लघुकथा वितृष्णा

By |May 10th, 2018|Categories: कहानी|Tags: , |

हम दोनों गले मिले फिर मैंने पूछा आचानक कैसे आना हुआ साथ ही ये बताया कि मेरी शादी पक्की हो गई है नम्बवर में शादी है इतनी जल्दी बता दिया मई चल रहा है तेरे पास बहुत समय है तैयारी करने का अब तू बता कैसे आयी है।

प्रकृति का कहर

By |August 30th, 2018|Categories: कविता, व्यंग्य|Tags: , , |

प्रकृति का कहर आज हम प्रकृति का कहर हम पे दिन प्रति दिन धाएँ! हम सब प्रकृति के [...]

रक्तदान

By |June 23rd, 2017|Categories: लघुकथा|

धनतेरस का दिन था। सब ओर खुशी का माहौल था। बच्चों ने पटाखे चलाने शुरु कर दिए थे। [...]