कुछ पढने को दो… 2018-02-11T17:10:39+00:00

मानवता

By | August 4th, 2017|Categories: गीत-ग़ज़ल|

मानवता को नूतन जग में, खिलने दो मुस्काने दो। ऊँच-नीच की बुरी धारणा, छोड़ो भी अब जाने दो।। [...]

प्यार

By | November 15th, 2017|Categories: कविता|

चलो सजना आंसमा पर हम घरौंदा एक बनाएंगे वहां एक प्यार का सागर सितारे उसमें बहते हैं ये [...]

देशभक्ति

By | November 1st, 2016|Categories: कविता|Tags: |

        क्यों  जमाने को आज हो क्या गया है, कातिल मुंसिफ बन क्यों गया है? कानून बनते थे जिन पर शिकंजे को, वही आज कानून बना क्यों रहा है? गाँधी को समझते थे जो अपना दुश्मन, ‘वाह वाह गाँधी’ आज  कर क्यों रहा है? अक्सर करते हैं जो गन्दी राजनीति, स्वच्छता की बात आज कर क्यों रहा है? लड़ा ही नहीं जो आजादी का जंग, ‘खुर्शीद’ को देशभक्ति सीखा  क्यों रहा है? -    मोहम्मद खुर्शीद आलम 

Spread the love
  • 67
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    67
    Shares