कुछ पढने को दो… 2018-02-11T17:10:39+00:00

“तरबतर”

By | August 20th, 2016|Categories: कविता|

लबालब भरे ये श्याम घन चले आये हैं डग बढ़ाये धरा लहलहाती , खिलखिलाती है उनके आतिथ्य में [...]

सहेली मिलन

By | July 29th, 2017|Categories: कविता|

यह कविता कल्पना से बनी हुई है वास्तविक नहीं है हमसे कहा गया कविता अधूरी है पूरी करें [...]

हम जंगल में बहक गये !

By | March 1st, 2018|Categories: होली|Tags: , |

चहका -होली गीत हम जंगल में बहक गये ! निमिष-निमिष साँसें सम्मोहित हम जंगल में बहक गये। लेकर [...]

द्वंद

By | July 30th, 2017|Categories: गीत-ग़ज़ल|

अपने अंतर्मन के द्वंदों से झूझ रही हूँ मैं। आज स्वयं से एक प्रश्न पूछ रही हूँ मैं।। [...]

हमसाया

By | June 4th, 2016|Categories: कविता|

तू कर ले कोशिश जो दूर जाने की पास आने की राह ढूंढ जाऊँगी तू अगर धागों को [...]

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