लेखक का अंतर्द्वंद

सोच रहा था क्या लिखूं, द्वन्द हो रहा था अंतर्मन में|
कुछ लिखूं फिर मिटा डालूं, हलचल थी मेरे मन में|
कुछ लिखा राजनीति पर, तो कभी शब्दों मैं हास्य बसा था|
कुछ रचनाएँ मॅहगाई की थी, तो किसी कविता मैं प्यार बसा था