आसरा

तरही गजल:- आप का जबसे दर दूसरा हो गया। आप के अस्क का आसरा हो गया।। चोट दिल पर लगी थी मिरे इसलिए। आज फिर जख्म मेरा हरा हो गया।। नींद आती नहीं…

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