भूख..

  कितना तड़पाती है कितना ललचाती है पशुओं कि भाँति मुँह से लार टपकाती है नज़रों को एक पल भी नहीं हटाती कही मिल जायेगी इक टूकड़ा ये उमीदें है मन में लाती…

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अंधेर नगरी , चौपट राजा

सोन चिड़िया कहलाने वाला मेरा देश भारत समय -समय पर आक्रमणकारियों के द्वारा लूटा जाता । हमारी विवश्ता कि हम अपने को लुटवाते रहे । महमूद गजनवी से लेकर मुगल सल्तनत के नष्ट…

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गाँव

मेरा हो गया बीमार बाबू क्या करें ? अब नहीं पीपल में ठंडी ब्यार बाबू क्या करें ? हल बिके तो बैल भी कलवा कसाई ले गया गाय बूढ़ी कट गयी लाचार बाबू…

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भागता शहर हूँ मैं

झूठ का बाना पहने हर आदमी में भागता शहर हूँ मैं…... घर और कार की किस्तों में बँटा .... मँहगे मोबाइल पर जेंटलमेन का स्वाँग ओढ़ता हर आदमी में थका शहर हूँ मैं......…

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साथी

साथी सफर में साथ रहो संग  मेरे देखो कहा तक चले सफर संग तेरे बेआबरू    से   हो   चले  है   हम   बिन  तेरे कैसे करे ये बयां कोई आरजू…

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बेबसी

‘‘यार मुझे तो एक ही लगन है,चाहे कुछ भी हो जाये एक फिल्म जरुर बनाउॅंगा। लेकिन फिल्म कैसी होगी वो तो तुम जानते ही हो। षुरुआत होगीवही नरेष रोड से ‘‘उसके घर के…

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आईना

जब कोई नही समझता हमे तब वो समझता है हमे जब कोई निभाता हमारा साथ तब वो निभाता हमारा साथ जब कोई नही सुनता हमे तब वो सुनता हमे वो शख्स हमे आईने…

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सपना

आदमी जब अपने सपनों को तिलांजलि देकर किसी औरत के लिए बुनता है एक नया सपना तब वह बन जाता है पति और जब पति पत्नी के ख्वाबों की दुनिया छोड़ देखने लगता…

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चमेली के फूल

कितना साम्य है, उस चमेली और इस चमेली में... वह चमेली झाड़ी या बेल जाति से संबंधित है मातृ-पितृविहीन यह चमेली उससे कम थोड़े ही मानी जाए पारसी षब्द से बनी वह चमेली…

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शर्त

आज सुबह से ही घर में सभी परेशान हैं कि इतनी जल्दी सब तैयारी कैसे होगी, कुछ का इंतजाम नहीं है। कल ही तो सभी वैष् णव देवी के दर्शन करके यात्रा से…

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पर्दाप्रथा ने बनवा दिया हवा महल

क्या आपको मालूम है कि पुराने समय में प्रचलित पर्दाप्रथा के कारण ही जग प्रसिद्ध इमारत जयपुर के हवा महल का निर्माण हुआ। यह कपोलकल्पित तथ्य नहीं है वरन् एक सत्य है। जिस…

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दुर्गा जा रही है

   कलरव ध्वनियों ने गूँज उठाया जगत-जीव द्वंद बनाने का हवन की खुशबू तेरी ओर से आई मुझे अनुभव जगाने का कहीं चावल, कहीं गुग्गुल, कहीं पुष्प सब बिखरे हैं, तेरे विलाप में…

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सपने

सपने हम में से उन सभी को देखने चाहिये जिन्होंने सुराख की चाह रखी है क्योंकि सपने अचानक हथेलियों पर उग नहीं आते, उसके लिये बुनने होते है कई-कई सपने जलना होता है…

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गांव की याद

" दादा जी , प्लीज़ कुछ भी गांव के बारे में बताइए न ! कैसा होता है ? " " फार्म हाउस की तरह होता होगा शायद , मैंने अपने बुक्स में जो…

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