आरजू

आरजू ! बस इतनी कि.... सफलता की  बुलंदियों को  छू  लूँ ,,, बनके उन्मुक्त परों का पंछी झूमती घटाओं को चूम लूँ । आरजू ! बस इतनी कि.... तमन्नाओं के हँसीं जहाँ में…

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बदलाव

हो कुछ खबर तो हमे भी बताना कहाँ खो गया वो कल हमे भी बताना घड़ियों की सुई हर पल बदल रही है। उम्र भी अब साथ छोड़ने को तैयार बैठी है। अगर…

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सात दिन की माँ

यह कथा सत्य घटना पर आधारित है| गोपनीयता बनाए रखने के लिए पात्रों के नाम और स्थान बदल दिए गए हैं| *कहते हैं, ईश्वर की मर्जी के आगे किसी की नहीं चलती और…

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फर्क

 विचार भाव या बुद्धि मुझमें कुछ  कम सही और थोड़े से ज्यादा तुम में सही, मिला बहुत तुम्हे और बहुत कुछ मुझे नहीं यूँ तो ; तुम में मुझ में कोई फर्क नहीं…

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पहली बारिश

सावन की पहली बारिश बून्द बून्द में दिखा इश्क़ मदहोश करती वो सोंधी खुसबू, उमस से सजे वातावरण में भी हर तरफ नजर आए तुम वो देखो इंद्रधनुष निकला सबने उसमे सात रंगों…

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भला करोगे भला होगा

जैसे कर्म करोगे तुम वैसे ही पाओगे तुम फल भला करोगे भला ही होगा आज नहीं तो कल इंसानियत के नाते किसी के काम जो तुम आओगे तुम्हारे भी बनेंगे काम क्योंकि जो…

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मन भीग गया

तेज धूप की अमानवीय गर्मी से पीड़ित पसीना पसीना हुआ बैचेन मन चाहने लगा ठंडी हवा का झोंका शीतल जल पर दूर- दूर तक ना था कोई ठिकाना ना ही कोई छाँव। अचानक…

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दर्द की तासीर

आये थे ग़म, साथ मेरे मुस्कुरा के चल दिए। इश्क़ मे पत्थर भी यारों चोट खाके चल दिए॥ दर्द कि तासीर में, जीना मुनासिब है, मगर। दर्द जब हद से गुजरे, तो गुनगुनाते…

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प्रेम वार्ता

घटा मन भावन बड़ा सुहावन मन हुआ चितचोर चाँद भी ढूंढे चकोर लगे अति पावन बड़ा लुभावन दादुर नाचे लगे सुख पावन अति सुहावन भीगे तनमन नदी बीच धारे बजे जलतरंग बैठ संग…

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सावन के मेघा 

  तपता सूरज तपती धरती गर्म हवाएं खुश्क मौसम, ऐसे में क्या संदेसा भेजूँ पी को कैसे भेजूँ किस संग भेजूँ……. फिर ऋतु चक्र में परिवर्तन आया ठंडी हवाएं काली घटाएँ दूत बन…

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वर्षा एवं कवि

गर्मी से 'भू’ थी सन्तापित ऊष्मा उर को कर रही व्यथित। जलती लू की स्वासें चलतीं ‘भू’ है वियोगिनी यह कहतीं। सचमुच वियोग की दशा यही पीड़ित जिससे चहुॅ ओर मही। पति से…

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नाइंसाफी

हमने तो उन्हें पनाह दी ! उसने फिर क्यों गुनाह किया  ? हमारे तमाम तोहफों के बदले -- हमसे बेबात ही दगा किया  ! किधर है तू - दुनिया के खुदा  ? कैसी…

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काले-काले बादल

मोती रूपी बूँदो का ये, खूब खजाना लुटाते है। धरती का करके हार - श्रृंगार, सब के मन को भा जाते है। काले-काले बादल आकाश मे, जब भी छा जाते है। नन्हे-नन्हे बालक…

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