चाँद

झलकाया नभ ने कैसा चाँद पूरा दुख और आधा चाँद देखे आंसू मेरे गालों पे मेरी ख़ातिर ही रोया चाँद मामूली शै नहीं दुनिया की मेरा चंदा है रब का चाँद सब पर…

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समर्पण

हां! यह समर्पण है ,आशा विश्वास का, वर्तमान भविष्य का ,नभ-धरा का, जन्म मरण का, सुख दुख का, भाग्य दुर्भाग्य का । जिसमें विश्वास और प्यार ऐसी प्रबल डोर है, जो हर डगमगाते…

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