मेरी बुआ ही मेरी माँ

दुनियाँ की किसी भी माँ का सम्पूर्ण जीवन तो अपने परिवार, पति और बच्चों के लिये ही समर्पित रहता है। …

तौबा! यह दोगले लोग (हाय-व्यंग्य कविता)

मगर बुराई करें, कोसे पीठ पीछे,
आपसे मिले वोह बड़े हमदम बनकर,