विश्राम स्थल

धुंधले धुंधले साये हैं रोशनी मिट रही है रंग धूल रहे हैं भोर थक गई है सांझ हो चली है मेरा आंचल पकड़ मेरे पीछे पीछे आना आशियाना तलाशते हैं कोई किसी खेत…

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तिरंगे की पुकार

झुकी नजर से रहा निहार। रो रहा तिरंगा ज़ार-ज़ार। अब दो बदल रंगों के अर्थ- पुराने अर्थ लगें बेकार। औरतों की सुन चीख-पुकार। केसरी रंग करता गुहार। प्यार अगर है मुझमें तुम्हें- आंचल…

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