गुब्बारों सा चंचल बचपन

गुब्बारों सा चंचल बचपन, आओ खेलें कहती दिल की धड़कन जीवन की इस आपाधापी में, न जाने कहाँ खो गया …

जीवन की आपाधापी में

जीवन की आपाधापी में कब वक्त मिला कुछ देर कहीं पर बैठ कभी यह सोच सकूँ जो किया, कहा, माना …