विश्राम स्थल

धुंधले धुंधले साये हैं रोशनी मिट रही है रंग धूल रहे हैं भोर थक गई है सांझ हो चली है मेरा आंचल पकड़ मेरे पीछे पीछे आना आशियाना तलाशते हैं कोई किसी खेत…

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