ऐ लहर

इन रेत पे बने पदचिन्हों को ऐ किनारे से टकराती समुन्दर की लहर तुम मत मिटाना हो सके तो इनके आंसू पोंछती बस इनको छूती हुई वापिस लौट जाना यह पहले से दुखी…

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दर्शन

एकतारा सा बज रहा यह समुन्दर में उतरे आसमान का नीला रंग इन घंटे घड़ियालों के संगीत में शंखों के नाद में मुझे तो केदारनाथ मंदिर के ज्योतिर्लिंग के दर्शन हो रहे हैं।…

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कैसा मौसम

यह कैसा मौसम है आसमान में न सूरज है न चाँद कायनात के रंगों को भी लगता है किसी गम ने खा लिया है आज तभी वो सारे सुंदर, सुनहरे, तीखे, भड़कीले रंग…

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शख्सियत

बेवजह, बेफजूल और बेकार नहीं है। वो शख्स जिससे मेरा सरोकार नहीं है।। दुनियाँ में अंधेरों को कैसे दूर करोगे। जब चाँद सितारों पर ऐतबार नहीं है।। मुझपर उसी गुनाह का इल्जाम धर…

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कुछ लोग शायर दिल से होते हैं 

कुछ लोग  शायर दिल से होते हैं और बहुत तो महज़ पेशे से होते हैं कुछ खट्टे, कुछ मीठे - से होते हैं रिश्ते... गोलगप्पे -से होते हैं शव गृह भी... वातानुकूलित होता है ए सी कमरों में…

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हिन्दी की दुविधा

हिन्दी साहित्य एवम भाषा की उत्पति और विकास के बारे में अग्रगण्य विद्वानों का भिन्न भिन्न मत रहा है। उनके मतों का अवलोकन करने पर यह निष्कर्ष स्पष्ट होता है कि हिन्दी का…

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पिंजरे में मैना बंधन में नारी

एक मैना पिंजरे की कैदी अतृप्त उसकी इच्छाएं आंख से आंसू टप टप गिरते पलकों में अभिलाषाएं पंजों में धागे बंधे हुए पिंजरा खुल भी जाता उड़ उतना ही सकती जितना मालिक चाहता…

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