यूकेलिप्टस, कौवे और मैं

हर रात जैसे तैसे करवटें ले लेकर गुजरती। हर रात सुबह का इंतजार, हर सुबह जेठ की भरी दुपहरी का …

एक पल के ग़ज़ल नाम

इंतहा हो गया एक इंतजार में संदियों तुम जो मना लों हमें भी ये आशाकी की बाहर जी कर कहां …

वो सावन दिखे तो बताना!

वो सावन दिखे तो बताना! सावन में नव विवाहित स्त्रियों की (मायके जाने की) प्रतीक्षा आजकल तो समाप्त ही हो …