देश की स्वतंत्रता का आज ऐसा हाल है

चंद पैसों के लिये ही जिंदगी को मारता
रात दिन करके वो मेनत जीतकर भी हारता

मोहबत ,इबादत या कुछ और 

दीवानगी, पागलपन या अदम्य साहस
मूर्खता तो नहीं कह सकते
जब सोच-समझकर खुद पिया जाता है ज़हर
पता है इस राह की मंजिल नहीं
पर रास्ते बहुत खूबसूरत है