मोहबत ,इबादत या कुछ और 

दीवानगी, पागलपन या अदम्य साहस मूर्खता तो नहीं कह सकते जब सोच-समझकर खुद पिया जाता है ज़हर पता है इस राह की मंजिल नहीं पर रास्ते बहुत खूबसूरत है

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स्त्रीयाँ

पढ़ा गया हमे जैसे पढ़े जाते है अखबार के पन्ने देखा गया हमे जैसे टेलिविजन पर देखी जाती है चित्र रचनाएँ सुना गया हमे जैसे मोबाइल की आवाज बजती है उसे उठाने से…

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जिंदगी है खेल नहीं

खेल सी हो चली है कैसी जिंदगी है ये अपनो को ही नोच रहे सब कैसी दरिंदगी है ये शर्मिन्दगी होती है महसूस क्या यही इनका काम है करता है एक गलत पर…

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