ज़रा सी बेवफ़ाई

ज़रा सी बेवफ़ाई करना जरूरी था ख़ुद में उलझती साँसों का सुलझना जरूरी था कब तक रोक कर रखते इस सैलाब को अश्क़ के पैमाने का छलकना जरूरी था बहुत तबाही मच चुकी…

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इश्क़ के रंग

हाथों में लेकर गुलाल मैं ढूढ रहा उन नजरों को , जिससे आंखे मिलाकर रंग पाऊ उसके सफ़ेद से चेहरों को | . पर मिली नहीं वो कहीं बहुत ढूढा इस गली, उस…

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