भगवान है पिता

घर-द्वार के सुंदरता की शान है पिता संसार में हस्ती बड़ी महान है पिता क्या कर दूं बच्चों के लिए सोचता हरपल संघर्षरत की बच्चों का भविष्य हो उज्ज्वल वो स्तम्भ है नातों…

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माँ(एक कविता)

ये कविता एक माँ के प्रति श्रद्धांजलि है। इस कविता में एक माँ के आत्मा की यात्रा स्वर्गलोक से ईह्लोक पे गर्भ धारण, बच्ची, तरुणी, युवती, माँ, सास, दादी के रूप में क्रमिक विकास और फिर देहांत और देहोपरांत तक दिखाई गई है।

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ईश्वर की चाह

जब दोनों नदी में स्नान कर रहे थे और पानी दोनों के गर्दन तक आ गया, तो अचानक गुरुदेव ने अपने शिष्य की गर्दन को पानी के भीतर डाल दिया। शिष्य के मन में बड़ा आश्चर्य ...

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हे कल्कि !

हे कल्कि! हे कल्कि! हे तारण हार! अतिशीघ्र आओ, और  इस धरा के दुःख दूर करो . हे देव! मजबूर, मासूम व् निर्दोष प्राणियों की रक्षा करो. अपने अस्र्त्रों-शस्त्रों से दुष्टों का संहार करो. कलयुग…

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गम बनाम खुशी

।। गम बनाम खुशी ।। गम बोला खुशी से ----बता बता दो जा रही हो जिसकी जिंदगी से। खुशी---वहाँ तो मेरा आना जाना लगा रहता है मैं देख नहीं सकती उनके दुखी चेहरे,…

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फिजूल है

  ये क्या इन आँखें में फिर आँसू दर्द-ए-दिल को समझाना फिजूल है। किस्मत से बदलती नहीं जिन्दगी हथेलियाँ को भिगाना फिजूल है। जहाँ एहसास-ए-दिल न हो वहाँ रूठना मनाना फिजूल है। जिसके…

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ईश्वर की आराधना

ईश्वर प्राप्ति अनुराग कैसा सबसे मोह छोड़ती जिंदगी ईश्वर प्राप्ति को मचली आकाश सी खामोशी शीतल बयार चलती अजीब सी बेचैनी निर्मल पावन जीवन माथे बीच ज्योति ओमकार जा मिलती आते-जाते जीवन मोह…

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