स्वागत नववर्ष !

एक शायर अमीरुल्लाह तस्लीम की यह पंक्तियां सोचने पर विवश करती हैं।
सुबह होती है, शाम होती है। उम्र यूं ही तमाम होती है।

माँ(एक कविता)

ये कविता एक माँ के प्रति श्रद्धांजलि है। इस कविता में एक माँ के आत्मा की यात्रा स्वर्गलोक से ईह्लोक पे गर्भ धारण, बच्ची, तरुणी, युवती, माँ, सास, दादी के रूप में क्रमिक विकास और फिर देहांत और देहोपरांत तक दिखाई गई है।

ईश्वर की चाह

जब दोनों नदी में स्नान कर रहे थे और पानी दोनों के गर्दन तक आ गया, तो अचानक गुरुदेव ने अपने शिष्य की गर्दन को पानी के भीतर डाल दिया। शिष्य के मन में बड़ा आश्चर्य …

ईश्वर की आराधना

ईश्वर प्राप्ति अनुराग कैसा सबसे मोह छोड़ती जिंदगी ईश्वर प्राप्ति को मचली आकाश सी खामोशी शीतल बयार चलती अजीब सी …