मुझसे कुछ रंज हो गया शायद…

गजल... 212, 112, 112 ,212 122, 112,112,212 बहर... मदीद. फाइलातुन, फाइलुन काफिया... हो गया रदीफ... शायद. वो रज़ामंद हो गया शायद वक्ते पाबंद हो गया शायद ! उरूजे तख्त पर कल थी हस्ती…

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