पिता

जो बेटी की विदाई में एक आँसू आँख में ना लाता है, बेटी की खुशी के लिए एक-एक पैसा जुटाता है,दहेज की मांग पर जो बेचैन हो जाता है,बेटी को विदा करके जो मन ही मन रोता है ,वो पिता होता है।